Somnath Jyotirlinga : कैसे हुई सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना, जानें इसके पीछे की रोचक कथा

Sanat Kumar Dwivedi
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  • जब चंद्रमा की तपस्या से पिघल गए महादेव

Somnath Jyotirlinga : भगवान शिव का प्रिय सावन का महीना शुरू हो गया है. सुबह से ही शिव मंदिर के बाहर भक्त लंबी कतार में खड़े हैं. शिवालयों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं. इस पवित्र महीने में कई श्रद्धालु भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का संकल्प भी लेते हैं. कहते हैं कि 12 ज्योतिर्लिंगों का दर्शन करने से जीवन का कल्याण हो जाता है. यदि आपने भी ऐसा कोई संकल्प लेने के बारे में सोचा है तो बिंदास बोल न्यूज़ आज आपको भगवान शिव के इन ज्योतिर्लिंगोंं के बारे में बताएंगे और इसकी शुरुआत गुजरात स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से होगी.

क्या है सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कहानी?

गुजरात के काथियावाड़ में समुद्र किनारे सोमनाथ मंदिर में यह ज्योतिर्लिंग स्थापित है. जिसे पहले प्रभासक्षेत्र कहा जाता था. वहां दक्ष प्रजापति नाम के राजा की 27 पुत्रियां थीं, जिनका विवाह चंद्रमा के साथ हुआ. लेकिन चंद्रमा का अटूट प्रेम केवल रोहिणी से था. इस वजह राजा दक्ष प्रजापति की अन्य 26 पुत्रियां बेहद दुखी रहने लगीं. एक बार उन्होंने क्रोध में आकर अपने पिता को इस बारे में बताया. तब दक्ष प्रजापति ने इसे लेकर चंद्रमा को कई बार समझाया. लेकिन रोहिणी के प्रति चंद्रमा का प्रेम कुछ इस कदर था कि उन पर इसका कोई असर नहीं हुआ.

अंतत: राजा दक्ष प्रजापति ने नाराज होकर चंद्रमा को श्राप दे दिया. इस श्राप के कारण चंद्रमा की शक्तियां क्षीण होने लगीं. चंद्रमा की सारी शक्तियां धीरे-धारे समाप्त होने लगीं. इससे चंद्रमा बहुत दुखी और चिंतित हो गए. चंद्रमा का ऐसा हाल देखते हुए अन्य देवी-देवता और ऋषिगण चंद्रमा के उद्धार के लिए ब्रह्माजी के पास गए. चंद्रमा पर मंडरा रहे इस संकट की कहानी सुनकर ब्रह्माजी ने कहा कि केवल भगवान शिव ही उन्हें इस श्राप से मुक्त कर सकते हैं.

इसके बाद चंद्रमा ने भगवान शिव की घोर तपस्या की. तब महादेव ने प्रसन्न होकर उन्हें अमरत्व का वरदान दिया. भगवान शिव ने कहा कि तुम्हें मिला श्राप तो समाप्त होगा ही, साथ ही साथ दक्ष प्रजापति के वचनों की रक्षा भी होगी. कृष्ण पक्ष में रोजाना तुम्हारी एक-एक शक्ति वापस आती जाएगी. लेकिन दोबारा शुक्ल पक्ष में उसी क्रम से तुम्हारी एक-एक कला बढ़ जाएगी. इसी तरह हर पूर्णिमा को पूर्ण चंद्रमा के दिन तुम 16 कलाओं से दक्ष हो जाओगे. चंद्रमा को मिले इस वरदान से सभी देवी-देवता बहुत खुश हो गए.

श्राप से मुक्त होते ही चंद्रमा ने अन्य देवताओं के साथ मिलकर भगवान शिव से यह प्रार्थना की कि वो माता पार्वती के साथ हमेशा के लिए यहां स्थापित हो जाएं. उनकी इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए भगवान शिव ज्योतर्लिंग के रूप में माता पार्वती के साथ यहां विराजमान हो गए. आज देश-दुनिया से श्रद्धालु भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने यहां आते हैं.

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का बहुत खास महत्व

हिंदू धर्म में ज्योतिर्लिंग विशेष महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. भारत में कुल 12 ज्योतिर्लिंग हैं, ये सब ज्योतिर्लिंग भगवान शिव की अनंत ऊर्जा का स्वरूप माने जाते हैं. इन 12 ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग सबसे पहले नंबर पर आता है. यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित है. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का बहुत खास महत्व माना जाता है.

इस ज्योतिर्लिंग के बारे में मान्यता है कि इसका निर्माण स्वयं चंद्रदेव के द्वारा किया गया है. सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव का पूजन विशेष विधि-विधान से किया जाता है. सोमनाथ का अर्थ है ‘सोम के स्वामी’, जो चंद्रमा के देवता हैं. यह मंदिर इस बात को भी प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है कि भगवान शिव समस्त सृष्टि के आधार हैं और सभी जीव-जंतुओं के पालनहार हैं.

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का उल्लेख शिव पुराण, स्कंद पुराण, और अन्य पवित्र ग्रंथों में भी मिलता है. इसे बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान प्राप्त है. मान्यता है कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है और उनके समस्त पापों का नाश होता है. इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन से भगवान शिव के साथ साथ मां पार्वती की भी कृपा प्राप्त होती है.

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