Tali : बजनी ताली एक हाथ से

Bindash Bol

डॉ प्रशांत करण
(आईपीएस) रांची

Tali : यह मामला एक पक्षीय है . दोनों हाथों से दो पक्ष मिलकर सरलता से ताली बजा लेते हैं . एक ने संसदीय भाषा का उपयोग किया नहीं कि दूसरा संसद , विधानसभा आदि को छोड़कर सीधे गली की भाषा पर निम्नगामी हो जाता है . यहाँ मामला द्विपक्षीय बन जाता है . लोगों का मनोरंजन भी हो जाता है . कई हाथ साफ़ भी कर डालते हैं . इससे अलग एक हाथ से ताली बजा लेना समर्पण और अभ्यास खोजता है . सबके बस की बात यह है नहीं . वाद -विवाद , आपसी सहमती हो न हो साधक एक हाथ से ताली बजा ही लेते हैं .
हम भाग्यशाली हैं कि हमारी राज्य सरकारें कहती रही हैं की उनकी सरकार ईमानदार है . पिछली सरकार भी खुलेआम एक हाथ से ताली बजाती जाती थी . जनता आश्चर्यचकित रहती . इसी आश्चर्य की अबस्था में पुरानी वाली सरकार बदल गयी . नयी वह आयी , जो उस समय विपक्ष में थी . आते ही इस सरकार का सारा ध्यान सिर्फ एक हाथ से ताली बजाने पर केंद्रित हो गया . एक हाथ इसलिए कि दूसरा तो रिश्वत लेने , विरोधियों के गिरेबान पकड़ने , गबन -घोटालों में व्यस्त रहते . कई अधिकारी से लेकर मंत्रियों तक के बारे में दावा किया जाता कि ताली बजाना उनके बाएं हाथ का कमाल है , दाहिने हाथ का हमसे मत पूछिए . हम आम जनता ने कभी नहीं पूछा .
एक चिकित्सक महोदय ताली तो दाहिने हाथ से बीमार की जेब पर बजाते और बायाँ हाथ अगर बीमार महिला हुई तो उसे टटोलने में बड़ी चालाकी से लगा देते . एक दिन खूब हल्ला हुआ और बीमार महिला के परिजनों ने उन्हें कूट दिया . ऐसा सौभाग्य कई आचार्यों , प्राचार्यों को भी प्राप्त हुआ . फिर एक हाथ से ताली बजनी बंद हुई .
मैं किसी से मिलते समय अपने दोनों हाथ बाँधकर रखता हूँ . पता नहीं कब वे प्रभावित होकर एक हाथ से ताली बजाने का अभ्यास न प्रारम्भ कर दे . इसलिए अपने दोनों हाथों को परस्पर एक -दूसरे पर नियंत्रण रखता हूँ . ताली बजा लेना नियंत्रण में छूट का परिणाम ही तो है . और विशेषकर जब मामला एक हाथ तक सीमित हो .

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