डॉ प्रशान्त करण
(आईपीएस) रांची :
Thinking : मेरे सामने एक छवि लगी है , मेरा मन उस पर टंगा है . छवि में लाल रंग के वस्त्र ऊपर पहने एक युवा लाल रंग के कंदुक से हरी घास पर खेलता. दीखता है . उसके सामने हरे रंग का ऊपरी वस्त्र पहने दूसरा युवा उसे और उसके कंदुक को कौतुहल से देख रहा है . लाल ऊपरी वस्त्र पहने युवा ने आधुनिकता और कंदुक क्रीड़ा के प्रतीक हल्के नीले रंग की छोटी पैंट पहन रखी है . वहीं हरे ऊपरी वस्त्र वाले युवा ने इस परम्परा का निर्वहन नहीं किया है . उसने इसके विपरीत पूरे पैर ढँकते हुए गहरे नीले रंग की पैंट पहन रखी है . उसके पास कोई कंदुक नहीं है . मेरा आशंकित मन संदेह करता है कि हो न हो ऊपरी लाल वस्त्र वाले, जिसे हम आगे क कहेंगे , ने ऊपरी हरे वस्त्र वाले , जिसे हम अब ख कहेंगे , से छीन तो नहीं लिया ? परम्परावादी अब पश्चिमी सभ्यता से पराजित जो होने लगे !
मेरा मन पूछता है कि क ने लाल रंग का ही चयन क्यों किया ? कई अन्य रंगों का विकल्प था . सम्भव है कि वह सनातनी हो , क्योंकि सनातनी पुरुष गेरुआ अथवा लाल वस्त्र धारण करना पसंद करते हैं . लेकिन एक शंका आ गयी . सच्चा सनातनी. होता तो अपनी पहचान रखता . युवा ने न तो यज्ञोपवीत (जनेऊ ) पहना है , टीकी दिख नहीं रही और तो और चंदन तिलक तक नहीं है . पक्का सनातनी होता तो दूसरे युवा को कंदुक दे देता .हो न हो यह लाल रंग वामपंथ का हो . तभी इसके कंदुक छीनने का सिद्धांत प्रतिपादित होगा . वामपंथ छीनता है , सनातन देता है !
अब छवि दूसरे युवा का परीक्षण करते हैं . इसने हरे रंग के ऊपरी वस्त्र का चयन क्यों किया ? हमारे भारतवर्ष ही क्या विश्व में हरा रंग एक समुदाय विशेष से जोड़कर देखा जाता है . यह कंदुक लेने में पिछड़ गया है . क्या पता यह कंदुक छीनने के लिए कहीं हिंसा का प्रयोग न कर बैठे . इस सिद्धांत से वह प्रतिशोध की ज्वाला में जल रहा है . एक अन्य भारतीय राजनीति के दृष्टिकोण से यह भी कहा जा सकता है कि समुदाय विशेष का वामपंथ गठबंधन से विश्वास हट गया है क्योंकि इसे अब पता चल गया है कि वे हमेंशा से अवसर मिलते ही भय दिखाकर ,उनका उपयोग कर ,वंचित रख नीचे धकलते रहे हैं . अब राजनीति से मुझे क्या ?
अभी इजऱाइल – ईरान युद्ध चरम पर है . ईरान इस्लामिक राष्ट्र है और इस दृष्टिकोण से दूसरा बिना कंदुक वाला युवा ईरान समर्थक लगता है . इजराइल के झंडे में हल्का नीला रंग है , जो लाल ऊपरी वस्त्र वाले युवा के पैंट का रंग है . कंदुक इसी के पास है और लाल रंग उसके क्रोध का परिचायक है .
मेरा मन फिर से नए चिंतन में लग गया है . कंदुक का लाल रंग कहीं अभियान सिंदूर का प्रतीक तो नहीं . इसी कारण हरे ऊपरी वस्त्र वाला युवक निराश , हताश और पराजित लग रहा है . ऐसा लगता है कि वह सिंदूरी कंदुक देख कर ही काँपने लगा है . यह भी सम्भव है कि लाल ऊपरी वस्त्र वाला युवक किसी सुंदर कन्या को प्रभावित करने , रिझाने के लिए लाल कंदुक लेकर हरे घास पर खड़ा हो गया है . ताकि दूर से ही कन्या उसे कंदुक खेलते देख उसको स्वास्थ्य पसंद युवा मान कर उस पर लट्टू हो जाए . यह भी सम्भव है कि इस युवा के माता – पिता ने उसके मोबाइल पर अधिकाधिक समय बीताने के कारण उससे उसका मोबाइल छीन लिया हो . फिर अनमना सा यह युवक अपनी खीझ मिटाने कंदुक लेकर पास खुले घास वाले स्थान पर आ गया हो . हरे रंग के ऊपरी वस्त्र वाले युवा को नशा का माल न मिला हो अथवा उसका ताजा ब्रेकअप हुआ हो . मेरी सोच आजकल की पीढ़ी के गणित से सही दिशा में जा रही लगती है . पर अपने तो इससे पुरानी पीढ़ी के हैं . हमें न युवा पीढ़ी समझ पायी न हम उन्हें !
बाकि पाठक अपनी कल्पना अपने अनुभव के अनुसार करने को स्वतंत्र हैं !
Thinking : छवि चिंतन
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