* रिटायर्ड कर्मी भी ले रहे थे वेतन! झारखंड पुलिस महकमे में 18 करोड़ से ज्यादा का गबन
* सिस्टम एक्सपोज्ड: रिटायर कर्मी को बनाया ‘जिंदा’, OTP साझा कर लुटाया खजाना
Treasury Fraud : झारखंड में सामने आए करोड़ों रुपये के ट्रेजरी घोटाले ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है। मामले के खुलासे के बाद राज्य सरकार ने देर रात एक अहम नोटिफिकेशन जारी करते हुए वेतन निकासी प्रक्रिया को पूरी तरह सख्त बनाने का फैसला लिया है।
प्रधान महालेखाकार कार्यालय और वित्त विभाग की जांच में यह सामने आया कि बोकारो और हजारीबाग पुलिस कार्यालयों से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी वर्षों तक होती रही और सिस्टम स्तर पर कई बड़ी लापरवाहियां जारी रहीं।

घोटाले से सामने आईं सिस्टम की बड़ी खामियां
सरकारी समीक्षा में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए….
* सेवानिवृत्त या गैर-कार्यरत कर्मियों के नाम पर वेतन भुगतान
* जीपीएफ प्रोफाइल में जन्मतिथि बदलकर फर्जी भुगतान
* निर्धारित वेतनमान से अधिक भुगतान
* विपत्र लिपिक द्वारा रिश्तेदारों के बैंक खातों में राशि ट्रांसफर
* निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी का OTP साझा करना
* वर्षों तक एक ही कर्मचारी के पास वित्तीय नियंत्रण
यानी वित्तीय अनुशासन की कई परतें एक साथ फेल होती दिखीं।
1. घोटाले का गणित: कहाँ कितनी सेंधमारी?
* बोकारो: मई 2024 से दिसंबर 2025 के बीच 3.15 करोड़ रुपये की अवैध निकासी।
* हजारीबाग: पिछले 8 वर्षों में 15.41 करोड़ रुपये का गबन।
* कुल राशि: लगभग 18.56 करोड़ रुपये से अधिक का चूना।
‘मोडस ऑपेरंडी‘: कैसे चपत लगाई गई सरकारी तिजोरी को?
इस पूरे मामले में 4 बड़े ‘लूपहोल्स’ है जिनके सहारे इतने बड़े कारनामे किए गए. ..
फर्जीवाड़े का डिजिटल खेल
बोकारो में एक रिटायर हो चुके कर्मचारी की जन्म तिथि (DOB) उसके GPF प्रोफाइल में बदल दी गई, ताकि उसे ‘ऑन ड्यूटी’ दिखाकर वेतन निकाला जा सके।
लिपिकों का ‘परिवार प्रेम’
बिल क्लर्क ने सरकारी खजाने से वेतन की राशि कर्मचारियों के बजाय अपनी पत्नी और सगे-संबंधियों के निजी खातों में ट्रांसफर कर दी।
OTP सिंडिकेट
निकासी पदाधिकारी (DDO) अपना सीक्रेट OTP क्लर्क के साथ साझा करते रहे। हद तो तब हो गई जब सितंबर 2025 से पहले अधिकारी और क्लर्क दोनों के OTP एक ही मोबाइल पर आ रहे थे।

कुर्सी से ‘फेविकोल’ सा जोड़
घोटालेबाज क्लर्क पिछले 10-12 वर्षों से एक ही सीट पर जमे थे, जिससे उनकी संदिग्ध गतिविधियां कभी जांच के दायरे में नहीं आईं।
सरकार की नई सख्ती : अब बिना सत्यापन नहीं मिलेगा वेतन
इस पूरे मामले को सरकार ने गंभीरता से लेते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए है। अब वेतन निकासी से पहले कई अनिवार्य जांच लागू की गई है…
* सर्विस बुक से मिलान: अब वेतन भुगतान से के नाम, पद और जन्मतिथि का मिलान अनिवार्य रूप से सर्विस बुक से करना होगा।
* पे-स्लिप का सत्यापन: केवल लेखा सत्यापन (Audit Verification) के आधार पर ही वेतन निर्गत होगा।
* बैंक खाता जांच: कर्मियों के बैंक अकाउंट नंबर का भौतिक सत्यापन करना होगा ताकि पैसा किसी रिश्तेदार के खाते में न जाए।
* सर्टिफिकेट अनिवार्य : अब हर DDO को वेतन विपत्र (Bill) पर यह लिखकर देना होगा कि उन्होंने सर्विस बुक से कर्मचारी का नाम, पद और जन्मतिथि का मिलान कर लिया है। इसके बिना ट्रेजरी से पैसा नहीं निकलेगा।
* DDO की जवाबदेही: OTP साझा करने की मनाही और डिजिटल ट्रांजैक्शन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की गई है।
* 3 साल की डेडलाइन: अब कोई भी क्लर्क 3 साल से अधिक समय तक एक ही सीट पर नहीं रह सकेगा। सरकार ने रोटेशन पॉलिसी को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है।

सिस्टम में कहां रह गई चूक?
* निगरानी तंत्र की विफलता: इतने सालों तक ऑडिट में यह गबन क्यों नहीं पकड़ा गया?
* उच्चाधिकारियों की भूमिका: क्या केवल क्लर्क दोषी है या निगरानी करने वाले अधिकारियों की ‘मौन सहमति’ भी थी?
* डाटाबेस समीक्षा: वित्त विभाग द्वारा डेटाबेस की समीक्षा के बाद और भी जिलों में ऐसे मामले मिलने की आशंका जताई जा सकती है।

ट्रेजरी घोटाला झारखंड के प्रशासनिक और वित्तीय गलियारे में एक बड़े ‘सिस्टम फेलियर’ की कहानी बयां करता है। सरकार अब सख्त मोड में है और यह नोटिफिकेशन भविष्य में वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) सुनिश्चित करने के लिए एक ‘चेकलिस्ट’ की तरह काम करेगा।