कौशल किशोर शुक्ला
Trump : ट्रंप का दूसरा कार्यकाल, जो जनवरी 2025 से शुरू हुआ और जो अब लगभग 14 महीने का हो चुका है, पूरी तरह सनक से भरा हुआ है, वह शांति का नोबेल पुरस्कार चाहते हैं, जबकि इसी दौरान उन्होंने सारे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर अमेरिकी सेना की ओर से ईरान को मिलाकर सात देशों पर सैन्य हमले या हस्तक्षेप किए हैं।
ईरान में जून 2025 में भी न्यूक्लियर साइट्स पर बमबारी की गई थी और अब फरवरी 2026 में बड़े पैमाने पर हमले किए जा रहे हैं, जिसमें वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई, इसके पहले जनवरी 2026 में वेनेजुएला में अमेरिका ने स्पेशल फोर्सेस रेड की, जिसमें राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया गया, कराकस पर बमबारी हुई, जिसमें 75 से ज्यादा लोग मारे गए, कहा गया यह ड्रग ट्रैफिकिंग और रिजीम चेंज के लिए था।
ट्रंप ने हूथी विद्रोहियों पर 1100 से ज्यादा स्ट्राइक्स की, जिसमें सैकड़ों मौतें हुईं, कहा गया यह रेड सी में शिपिंग थ्रेट्स के खिलाफ था, ईराक में उसने काउंटर-टेररिज्म आपरेशंस चलाए और 135 से अधिक स्ट्राइक्स कीं, कहा गया आइएसआइ टारगेट पर है, दिसंबर 2025 में अमेरिकी सैनिकों पर हमले के जवाब में अमेरिका ने सीरिया में भी स्ट्राइक्स की, सोमालिया में काउंटर टेररिज्म के नाम पर बमबारी की गई, पिछले साल क्रिसमस पर नाइजीरिया में भी अमेरिका ने हमले किए।
इसके अलावा, ट्रंप ने कोलंबिया , ग्रीनलैंड, पनामा कैनाल और कनाडा को भी धमकियां दी हैं, लेकिन अब तक डायरेक्ट अटैक नहीं हुए।
इस प्रकार देखें तो ट्रंप ने 2025 में ही कई देशों पर स्ट्राइक्स शुरू की और 2026 में वेनेजुएला और ईरान पर बड़े आपरेशंस, ये कार्रवाइयां इंटरनेशनल ला के तहत विवादास्पद हैं और कुछ को वार क्राइम्स का नाम दिया जा रहा है।
ईरान में मामला फंस गया है, ट्रंप ने खुद कहा है कि ईरान आपरेशन 4-5 हफ्ते तक चल सकता है, और इसमें तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, उधर ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लरिजानी ने साफ साफ कहा है कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं होगी…!
ईरान पर हमले की सनक का नतीजा है कि अब यह क्षेत्रीय युद्ध में बदल चुका है, जिसमें अमेरिका, इजरायल, ईरान, हिजबुल्लाह और गल्फ देश शामिल हो चुके हैं।
ईरान ट्रू प्रामिस 4 नाम से जवाबी और घातक हमले कर रहा है, उसने पड़ोस के अलग-अलग देशों में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से अमेरिकी बेसों पर हमले कर तबाही मचा दी है, ये ठिकाने थे बहरीन (फिफ्थ फ्लीट हेडक्वार्टर), कतर (अल-उदैद एयर बेस), यूएई (अल-धफ्रा बेस), कुवैत (अली अल-सलेम बेस), जार्डन, सऊदी अरब, इराक (कुर्दिस्तान) और ओमान, इजरायल पर तो वह मिसाइलें दाग ही रहा है, उसने स्ट्रेट आफ होर्मुज बंद कर दिया है, जो ग्लोबल आयल सप्लाई का 20% हिस्सा है।
संघर्ष लेबनान तक फैल चुका है, हिजबुल्लाह ने खामेनेई की मौत का बदला लेने का एलान करते हुए हुए उत्तरी इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, 2024 से लागू सीजफायर टूट गया है, इजरायल ने भी लेबनान पर बड़े एयर स्ट्राइक्स किए हैं।
ताजा अफरातफरी यह है कि कुवैती एयर डिफेंस ने गलती से तीन अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल्स मार गिराए, ईरान ने गल्फ में अमेरिकी और उसके सहयोगी असेट्स पर नई वेव्स छोड़ी हैं, जिसमें सऊदी रिफाइनरी भी आग की चपेट में आ गई है।
फिलहाल, इतना समझिए कि यह युद्ध अब मल्टी-फ्रंट है और लंबा चल सकता है, शांति की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल कोई सीजफायर नहीं दिख रहा, सोचिए, कोई सनकी सत्ता पर आ जाए तो कितना खतरनाक होता है, अमेरिका में भी ट्रंप का विरोध हो रहा है…!
