Vande Mataram : तेलंगाना की राजनीति में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयान ने “वंदे मातरम”, संविधान और देशभक्ति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। करीमनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि भारत का संविधान “भारत माता” के नाम से नहीं बल्कि “We The People” से शुरू होता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है और देशभक्ति को किसी धार्मिक पूजा से जोड़ना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
ओवैसी ने अपने भाषण में बहादुर शाह ज़फर और स्वतंत्रता सेनानी यूसुफ मेहरअली का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि अगर देशप्रेम को किसी एक धार्मिक प्रतीक से जोड़ा जाएगा तो उन स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को कैसे देखा जाएगा जिन्होंने अलग-अलग पृष्ठभूमि से आकर आजादी की लड़ाई लड़ी। उनका कहना था कि संविधान की प्रस्तावना स्वतंत्रता, समानता, न्याय और भाईचारे की बात करती है और यही देश की असली पहचान होनी चाहिए।
अपने संबोधन में ओवैसी ने राष्ट्रीय राजनीति और विदेश नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने रूस से तेल आयात को लेकर BJP के राष्ट्रवाद पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भारत ने तेल खरीद कम किया है तो चीन ने सस्ता कच्चा तेल खरीदकर फायदा उठाया है। उन्होंने यह भी कहा कि जब अमेरिका ने भारत के आर्थिक फैसलों पर चेतावनी दी, तब राष्ट्रवाद की बात करने वाले नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठना चाहिए।
नगर निगम चुनावों के संदर्भ में ओवैसी ने करीमनगर की स्थानीय समस्याओं को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी के बावजूद शहर में सड़क, जल निकासी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं और कुछ इलाकों की उपेक्षा की गई है। उन्होंने स्थानीय विधायक पर निशाना साधते हुए दावा किया कि चुनाव के बाद राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं और मतदाताओं को सावधान रहना चाहिए।
ओवैसी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता की बात की है, जबकि आलोचक इसे राष्ट्रवाद के खिलाफ बता रहे हैं। कुल मिलाकर यह विवाद केवल एक बयान नहीं बल्कि उस बड़ी बहस को सामने लाता है जिसमें देशभक्ति, संविधान और धार्मिक पहचान जैसे मुद्दे एक साथ जुड़ जाते हैं। आने वाले चुनावी माहौल में यह मुद्दा सियासत को और गर्मा सकता है।
