Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल 2024 लोकसभा में 12 घंटे की चर्चा के बाद पास हो गया. 288 सांसदों ने पक्ष में, 232 ने विपक्ष में वोट डाला. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे पेश किया था. किरेन रिजिजू ने इसे उम्मीद (यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) नाम दिया है.
वक्फ क्या है?
वक्फ एक इस्लामिक परंपरा है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को धार्मिक, सामाजिक या पुण्य कार्यों के लिए स्थायी रूप से समर्पित कर देता है. यह संपत्ति स्थायी रूप से वक्फ बोर्ड के अधीन हो जाती है और उसका इस्तेमाल समुदाय के भले के लिए किया जाता है. यह संपत्ति कृषि भूमि, भवन, दरगाह, मस्जिद, स्कूल, अस्पताल, कब्रिस्तान, इदगाह जैसे कई रूपों में हो सकती है.
वक्फ बोर्ड और उसकी भूमिका
भारत में वक्फ बोर्ड स्थानीय स्तर पर हर राज्य में होते हैं, जो वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन करते हैं. वक्फ बोर्ड के पास कुल मिलाकर 9.4 लाख एकड़ जमीन और 8.7 लाख संपत्तियां हैं. इन संपत्तियों की कुल कीमत 1.2 लाख करोड़ तक आंकी जाती है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े भूमि मालिकों में से एक बन जाता है. वक्फ बोर्ड के द्वारा की गई प्रबंधकीय गलतियों और कानूनी विवादों के कारण कई वक्फ संपत्तियां अदालतों में भी जा चुकी हैं.
सरकार वक्फ कानून में क्यों संशोधन कर रही है?
वक्फ एक्ट 1995 में प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य वक्फ बोर्डों के कामकाज में पारदर्शिता लाना और उनका मैनेजमेंट ज्यादा प्रभावी बनाना है. वर्तमान में वक्फ बोर्ड के ज्यादातर सदस्य चुनाव के द्वारा चुने जाते हैं, लेकिन नए बिल के तहत यह बोर्ड के सदस्य सरकारी नामांकित होंगे. इसके अलावा, वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण और सही मूल्यांकन करना अनिवार्य होगा, ताकि संपत्तियों का सही तरीके से प्रबंधन हो सके.
सरकार का कहना है कि वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता बढ़ाने और संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन करने के लिए यह संशोधन जरूरी है.
क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
- वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण: वक्फ संपत्तियों को ज़िले के कलेक्टर के पास पंजीकृत करवाना अनिवार्य होगा ताकि उनकी सही कीमत और स्थिति का आंकलन किया जा सके.
- बोर्ड के सदस्य: नए बिल के अनुसार, वक्फ बोर्ड के सभी सदस्य अब सरकार द्वारा नामांकित किए जाएंगे. इसमें गैर-मुस्लिम लोग भी बोर्ड के सदस्य बन सकते हैं और कम से कम दो सदस्य गैर-मुस्लिम होने चाहिए. इसके अलावा, वक्फ बोर्ड का सीईओ भी गैर-मुस्लिम हो सकता है.
- महिलाओं की भागीदारी: इस बिल में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि वक्फ बोर्डों में महिलाओं की अनिवार्य भागीदारी होनी चाहिए, ताकि समुदाय में समानता और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके.
सर्वेक्षण और मुकदमे
वक्फ बोर्ड के पास भारी मात्रा में संपत्तियां हैं, लेकिन इन संपत्तियों से संबंधित कई विवाद अदालतों में चल रहे हैं. वर्तमान में, वक्फ ट्रिब्यूनल में 40,951 मामले लंबित हैं, जिनमें से 9,942 मामले मुस्लिम समुदाय द्वारा वक्फ संस्थाओं के खिलाफ दायर किए गए हैं. इन विवादों में वक्फ संपत्तियों के गलत प्रबंधन और अधिकारियों की लापरवाही शामिल है.
क्या वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती दी जा सकती है?
हां, वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है. उच्च न्यायालय इस फैसले को सही गलत या संशोधित कर सकता है.
क्या वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति पर दावा कर सकता है?
वक्फ बोर्ड केवल उन संपत्तियों पर दावा कर सकता है जो धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित की गई हों. निजी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कोई दावा नहीं हो सकता है.
वक्फ कानून में प्रस्तावित संशोधन सरकार का प्रयास है ताकि वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन हो सके और उनमें अधिक पारदर्शिता लाई जा सके. हालांकि, इसका विरोध मुस्लिम समुदाय और विपक्षी दल कर रहे हैं, जो इसे असंवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं. अब देखना यह है कि यह संशोधन कानून आखिरकार कैसे लागू होता है और इसका क्या असर पड़ता है.
नए वक्फ बिल में क्या है?
मौजूदा सरकार अपने सहयोगी दलों की मांग को स्वीकार करते हुए नए बिल में कई परिवर्तन किए हैं, जैसे पांच वर्षों तक इस्लाम धर्म का पालन करने वाला ही वक्फ को अपनी संपत्ति दान कर सकेगा. दान की जाने वाली संपत्ति से जुड़ा कोई विवाद होने पर उसकी जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा. इसके साथ ही पुराने कानून की धारा 11 में संशोधन को भी स्वीकार कर लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि वक्फ बोर्ड के पदेन सदस्य चाहे वह मुस्लिम हों या गैर मुस्लिम, उसे गैर मुस्लिम सदस्यों की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा. इसका अर्थ यह कि वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की संख्या बढ़ सकती है.
भारत में कब बना था वक्फ एक्ट
अब जानते हैं कि भारत में वक्फ की परंपरा कब शुरू हुई तो बता दें कि इसका इतिहास 12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय से जुड़ा है और भारत में आजादी के बाद 1954 में पहली बार वक्फ एक्ट बना था और फिर साल 1995 में इस एक्ट में कुछ संशोधन किए गए थे. फिर नया वक्फ एक्ट बना और इसमें साल 2013 में भी कई बदलाव किए गए.
साल 2013 के बाद 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में वक्फ एक्ट में संशोधन कर नया वक्फ बिल पेश किया गया, जिसके खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए. विरोध के बाद बिल का ड्राफ्ट तैयार किया गया और इसे संसद की जेपीसी को भेज दिया गया, जिस पर चर्चा हुई और 27 जनवरी 2025 को जेपीसी ने बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी देकर सुझाए गए 14 संशोधनों को स्वीकार किया. इसके बाद 13 फरवरी 2025 को जेपीसी की रिपोर्ट संसद में पेश की गई. 19 फरवरी 2025 को कैबिनेट की बैठक में वक्फ के संशोधित बिल को मंजूरी मिल गई और अब आज यानी दो फरवरी को यह बिल संसद में पेश होगा, जिसपर 8 घंटे की बहस होगी और फिर इस पर वोटिंग होगी.
वक्फ एक्ट में संशोधन क्यों किया गया?
2022 से अब तक देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में वक्फ एक्ट से जुड़ी करीब 120 याचिकाएं दायर की गईं थीं जिसमें मौजूदा वक्फ कानून में कई खामियां बताई गईं. इनमें से करीब 15 याचिकाएं मुस्लिमों की तरफ से हैं, जिसमें सबसे बड़ा तर्क यह था कि एक्ट के सेक्शन 40 के मुताबिक, वक्फ किसी भी प्रॉपर्टी को अपनी प्रॉपर्टी घोषित कर सकता है. इसके खिलाफ कोई शिकायत भी वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल में ही की जा सकती है और इस पर अंतिम फैसला ट्रिब्यूनल का ही होता है. आम लोगों के लिए वक्फ जैसी ताकतवर संस्था के फैसले के कोर्ट में चैलेंज करना आसान नहीं है.