* “अदालत के फैसले से तय होगा—राहुल का ‘राजतिलक’ होगा या ‘वनवास’।”
Rahul Gandhi : भारतीय राजनीति के गलियारों में इस समय केवल एक ही सवाल गूँज रहा है—क्या एक टाइपिंग एरर किसी का राजनीतिक करियर खत्म कर सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने खड़ा यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की नागरिकता का नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े विपक्षी चेहरे की ‘वैधानिकता’ का है। 2003 की एक ब्रिटिश कंपनी ‘Backops Limited’ से शुरू हुआ यह सफर अब गृह मंत्रालय (MHA) की सीलबंद फाइलों तक पहुँच चुका है।
1. विवाद की जड़: क्या ‘British’ शब्द महज एक गलती थी?
पूरे मामले का केंद्र UK Companies House के रिकॉर्ड्स हैं। आरोप है कि राहुल गांधी ने अपनी कंपनी के दस्तावेजों में खुद को ‘British Citizen’ दर्शाया।
* शिकायतकर्ता का तर्क: Citizenship Act 1955 की धारा 9(2) स्पष्ट कहती है कि यदि किसी भारतीय ने स्वेच्छा से दूसरे देश की नागरिकता ली, तो उसकी भारतीय नागरिकता ‘स्वतः’ समाप्त हो जाएगी।
* राहुल गांधी का पक्ष: यह केवल एक क्लेरिकल त्रुटि (Clerical Error) है। इसे सुधारने के लिए फॉर्म पर हाथ से काटकर ‘Indian’ भी लिखा गया था। उनके पास कभी ब्रिटिश पासपोर्ट नहीं रहा।
2. 2026 का नया मोड़: MHA और ब्रिटिश सरकार की ‘सीक्रेट’ फाइलें
2025-26 में इस केस ने तब रफ्तार पकड़ी जब कर्नाटक के कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने नए साक्ष्य पेश किए।
* ब्रिटिश इनपुट: हाल ही में ब्रिटिश सरकार ने कुछ दस्तावेज भारत के गृह मंत्रालय के साथ साझा किए हैं।
* कोर्ट का रुख: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि नागरिकता और ‘Foreigners’ रिकॉर्ड से जुड़ी पूरी फाइल अदालत के सामने पेश की जाए। 19 मार्च 2026 की सुनवाई इस दिशा में ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकती है।
3. अदालती चक्रव्यूह: तीन मोर्चों पर जंग
यह मामला केवल एक अदालत तक सीमित नहीं है, बल्कि एक कानूनी मकड़जाल बन चुका है:
| अदालत | मुद्दा | वर्तमान स्थिति |
| दिल्ली हाई कोर्ट | सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका | दोहरी नागरिकता की जांच लंबित। |
| रायबरेली MP/MLA कोर्ट | आपराधिक जांच (FIR) | BNS और पासपोर्ट एक्ट के तहत बहस जारी। |
| इलाहाबाद हाई कोर्ट | गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड | 19 मार्च को फाइलों का सत्यापन। |
4. बड़ा सवाल: क्या रद्द होगी संसद सदस्यता?
यदि अदालत को ऐसे पुख्ता सबूत मिलते हैं कि राहुल गांधी ने जानबूझकर ब्रिटिश नागरिकता स्वीकार की थी, तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:
Section 9(2) का प्रहार: भारतीय नागरिकता का तत्काल अंत।
चुनावों पर रोक: विदेशी नागरिक होने के नाते वे चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित हो सकते हैं।
आपराधिक कार्यवाही: गलत जानकारी देने के लिए पासपोर्ट एक्ट और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत जेल की सजा।
”यह केवल फॉर्म भरने की गलती नहीं है, यह संविधान की आत्मा और संसद की पवित्रता के साथ खिलवाड़ है।” — विपक्षी खेमे का तर्क।
”जब चुनावी मैदान में हारने लगते हैं, तो पुरानी और मृत फाइलों को राजनीतिक हथियार बनाया जाता है।” — कांग्रेस का पलटवार।
इंतजार 19 मार्च का
अभी तक कोई भी ऐसा ‘स्मोकिंग गन’ (निर्णायक सबूत) सार्वजनिक नहीं हुआ है जो यह साबित करे कि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश पासपोर्ट था। पूरा मामला ‘फॉर्म-एरर’ बनाम ‘संवैधानिक धोखाधड़ी’ के बीच झूल रहा है। कुछ घंटे घंटे बाद लखनऊ बेंच से आने वाली हवा तय करेगी कि राहुल गांधी का ‘लीडरशिप ग्राफ’ ऊपर जाएगा या कानूनी भंवर में फंस जाएगा।
