Thalapathy Vijay : तमिलनाडु की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज हो सकता है। अभिनेता से राजनेता बने जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) सत्ता के दरवाज़े तक पहुंचती दिखाई दे रही है। शुरुआती रुझानों में TVK स्पष्ट बढ़त बनाकर सरकार गठन की ओर बढ़ रही है।
सबसे बड़ा राजनीतिक झटका सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) को लगा है, जो तीसरे स्थान पर सिमटती दिख रही है, जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) दूसरे नंबर पर बनी हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपनी पारंपरिक कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र सीट पर हार चुके हैं हैं।
सिनेमा से सत्ता तक: ‘थलापति’ की राजनीतिक एंट्री
2024 में बनी TVK को शुरू में राजनीतिक प्रयोग माना जा रहा था, लेकिन विजय ने राजनीति में आते ही स्पष्ट एजेंडा रखा…
* भ्रष्टाचार मुक्त शासन
* नशा मुक्त तमिलनाडु
* युवाओं और महिलाओं का सशक्तिकरण
* शिक्षा, रोजगार और विकास केंद्रित राजनीति
फिल्मी लोकप्रियता को उन्होंने जनआंदोलन में बदला। ‘स्टार इमेज’ को ‘राजनीतिक भरोसे’ में बदलना ही उनकी सबसे बड़ी रणनीतिक सफलता रही।
द्रविड़ दलों का गिरता किला?
तमिलनाडु की राजनीति पिछले छह दशकों से द्रविड़ विचारधारा केंद्रित दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही। लेकिन इस चुनाव ने पहली बार उस वर्चस्व को चुनौती दी है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार…
* पारंपरिक पहचान आधारित राजनीति से मतदाता थक चुके थे
* नई पीढ़ी विकास और रोजगार को प्राथमिकता दे रही है
* सोशल मीडिया और युवाओं की लामबंदी ने चुनावी गणित बदल दिया
वैचारिक विवाद बना चुनावी मुद्दा
DMK सरकार पर लंबे समय से सांस्कृतिक और वैचारिक बहसों को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे।
2023 में मंत्री उदयनिधि स्टालिन के ‘सनातन धर्म’ संबंधी विवादित बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तूफान खड़ा किया था। विपक्षी दलों ने इसे हिंदू आस्था के खिलाफ बताया, जबकि DMK नेताओं ने इसे द्रविड़ आंदोलन की वैचारिक परंपरा से जोड़ा।
विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण और मध्यम वर्गीय मतदाताओं के बीच सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा इस चुनाव में निर्णायक बन गया।
जनता का नया संदेश
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार जारी स्टैटिक्स में मेजेंटा रंग वाली सीटों पर TVK की बढ़त स्पष्ट दिखाई दे रही है — जो राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।
यह परिणाम सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति के नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।
क्या बदलेगा अब?
यदि रुझान नतीजों में बदलते हैं तो….
* तमिलनाडु में पहली बार गैर-द्रविड़ नई पार्टी का उदय
* फिल्म स्टार आधारित राजनीति का नया मॉडल
* विकास बनाम पहचान की नई राजनीतिक बहस
सवाल अब यही है – क्या ‘थलापति मॉडल’ दक्षिण भारतीय राजनीति की नई दिशा तय करेगा?