Iran War:इजरायल ने ईरान के टॉप कमांडर अली लारीजानी और सोलेमानी को मार गिराने के बाद अब नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई को खुली चुनौती दी है। IDF ने कहा, ‘उसे पाताल से भी ढूंढकर ले आएंगे।’ जानें क्या है इजरायल का ‘हंट डाउन’ मिशन…
इजराइल की खुली चेतावनी
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने ईरान के टॉप लीडरशिप को सीधी चेतावनी दी है। इजरायल ने साफ किया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई अब उनके सैन्य अभियान के टारगेट पर हैं। IDF प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफरिन ने कड़े शब्दों में कहा कि इजरायल के लिए कोई भी ‘अछूता’ (Immune) नहीं है और वे खतरे का पीछा कर उसे बेअसर करना जारी रखेंगे।
मुजतबा खामेनेई सेफ नहीं- इजरायल
एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान आईडीएफ प्रवक्ता ने मुजतबा खामेनेई के अज्ञात ठिकाने और उनकी चुप्पी पर तंज कसते हुए कहा, ‘हम उनका भाग्य नहीं जानते, न उन्हें सुन पा रहे हैं और न देख पा रहे हैं। लेकिन वह सुरक्षित नहीं हैं। हम उनका पीछा करेंगे, उन्हें ढूंढ निकालेंगे और उन्हें न्यूट्रलाइज करेंगे।’
लारीजानी और सोलेमानी की मौत से ईरान को बड़ा झटका
इससे पहले इजरायल ने एक सफल ओवरनाइट स्ट्राइक में ईरान के दो बेहद पावरफुल अधिकारियों को मार गिराने का दावा किया। पहला नाम अली लारीजानी का है, जो ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के सचिव थे। उन्हें अयातुल्ला खामेनेई के बाद देश के सबसे ताकतरवर नीति-निर्धारकों में गिना जाता था। दूसरा नाम जनरल गुलामरेजा सोलेमानी का है, जो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के तहत आने वाली ‘बसीज फोर्स’ के कमांडर थे। ईरानी सरकारी मीडिया ने भी इन दोनों अधिकारियों की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इन मौतों को ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।
बसीज फोर्स पर भी रहेगी नजर
इजरायल ने सिर्फ टॉप लीडरशिप ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सक्रिय अर्धसैनिक बल ‘बसीज’ (Basij Force) को भी चेतावनी दी है। जनरल सोलेमानी के नेतृत्व वाली यह फोर्स ईरान में आंतरिक असंतोष को दबाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जानी जाती है। प्रवक्ता डेफरिन ने कहा, ‘हम हर उस शख्स तक पहुंचेंगे जो इजरायल के खिलाफ हाथ उठाएगा।’
मुजतबा खामनेई को लेकर इजराइल का प्लान
अली लारीजानी के बारे में माना जाता था कि वे अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद से पर्दे के पीछे से सरकार चला रहे थे। वहीं, मुजतबा खामेनेई का नाम अब सर्वोच्च पद के लिए सबसे आगे है। जानकारों का मानना है कि इजरायल ने सीधे तौर पर उनका नाम लेकर बता दिया है कि तेल अवीव अब ईरान के सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को भी सैन्य दबाव के जरिए प्रभावित करने की मंशा रखता है।
