South Pars Gas field: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इजराइल ने दक्षिणी ईरान में साउथ पार्स गैस फील्ड पर एयरस्ट्राइक की है. इस हमले के बाद ईरान भी आक्रामक हो गया और उसने खाड़ी देशों के गैस और तेल के कुओं पर हमले किए. कतर से लेकर सऊदी के तेल ठिकाने धधकने लगे. इजराइली हमले के बाद खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बयान जारी करना पड़ा और ये कहना पड़ा कि अमेरिका को पार्स गैस फील्ड पर कार्रवाई का अंदाजा नहीं था.
ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जो कुछ हुआ है, उससे गुस्से में आकर इजराइल ने साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि यह पूरी तरह से इजराइल का ऑपरेशन था. उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस हमले के बारे में कुछ भी पता नहीं था न ही उन्हें कोई अंदाजा था कि ऐसा होने वाला है.
इजराइली हमले की इन देशों ने की निंदा
साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजराइली हमले की फ्रांस ने भी निंदा की है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि मैंने राष्ट्रपति ट्रंप से बात की है. ऊर्जा और जल आपूर्ति सुविधाओं को निशाना बनाने वाले हमलों पर बिना किसी देरी के रोक लगाना हमारे साझा हित में है. ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को भी सैन्य तनाव से सुरक्षित रखा जाना चाहिए. ओमान जैसे खाड़ी देश ने भी इस हमले की निंदा की है. संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है.
इजराइली के हमले के जवाब में ईरान ने कतर और सऊदी में गैस ठिकानों को निशाना बनाया. इसपर ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अन्यायपूर्ण तरीके से कतर की LNG गैस सुविधा के एक हिस्से पर हमला कर दिया. उन्होंने ये भी कहा कि अगर ईरान ने अब कतर पर हमला किया तो वो साउथ पार्स गैस फील्ड को पूरी तरह से खत्म कर देंगे.
बता दें कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक कतर ग्लोबल एनर्जी मार्केट में एक अहम भूमिका निभाता है. लड़ाई शुरू होने के समय ही उत्पादन रोक दिया गया था और अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि इस नुकसान के कारण लड़ाई समाप्त होने के बाद भी आपूर्ति की बहाली में देरी हो सकती है.
साउथ पार्स गैस फील्ड इतना अहम क्यों?
साउथ पार्स दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस फील्ड मानी जाती है. साउथ पार्स 9,700 वर्ग किलोमीटर के एक गैस क्षेत्र का हिस्सा है. इसे ईरान और कतर आपस में साझा करते हैं. इस क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई हिस्सा ईरानी साउथ पार्स है, जबकि कतर की तरफ वाले हिस्से को ‘नॉर्थ डोम’ या ‘नॉर्थ फील्ड’ कहा जाता है.
यह गैस क्षेत्र फारस की खाड़ी के नीचे स्थित है. अनुमान है कि इस क्षेत्र में 1800 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस मौजूद है, जो पूरी दुनिया की जरूरतों को 13 साल तक पूरा करने के लिए काफी है. यह गैस फील्ड साल 2002 से उत्पादन कर रहा है और ईरान के कुल गैस उत्पादन का तीन-चौथाई हिस्सा इसी से आता है. साउथ पार्स पर हमले और उसके जवाब में ईरान की जवाबी कार्रवाई की खबर के बाद तेल और गैस की कीमतों में आई अचानक तेजी से इस बात का अंदाजा मिलता है कि यह कितना महत्वपूर्ण है.
ईरान की ऊर्जा आपूर्ति का आधार
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, ईरान प्राकृतिक गैस का दुनिया का चौथा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. साउथ पार्स ईरान की ऊर्जा आपूर्ति का आधार है. IEA के अनुसार, इसकी लगभग 80 प्रतिशत बिजली गैस से पैदा होती है और उस गैस का अधिकांश हिस्सा साउथ पार्स से आता है.
ईरान साउथ पार्स से ली जाने वाली ज्यादातर गैस का इस्तेमाल करता है, लेकिन यह फील्ड इराक जैसे देशों के लिए भी बहुत जरूरी है, जो 40 प्रतिशत तक की सप्लाई के लिए ईरानी गैस एक्सपोर्ट पर निर्भर है.
पहले भी हो चुका है हमला
यह पहली बार नहीं है जब इस गैस फील्ड को निशाना बनाया गया है. पिछले साल जून में ईरान के साथ युद्ध के दौरान भी इजराइल ने इसपर हमला किया था. उस समय उसने साउथ पार्स के फेज 14 की चार यूनिट्स को निशाना बनाया था, जो कतर के गैस इंस्टॉलेशंस से लगभग 200 km दूर थीं.
