* यह सम्मान न सिर्फ डॉ. मिंज के लिए, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के लिए वैश्विक पहचान का प्रतीक है।
* 15 मई 2026 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में मिलेगा ‘ग्लोबल अवॉर्ड’, जनजातीय संस्कृति संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान का सम्मान
* झारखंड के ‘सांस्कृतिक ध्वजवाहक’ डॉ. अभय सागर मिंज को न्यूयॉर्क में मिलेगा ‘ग्लोबल अवॉर्ड’
Global Award 2026 : डीएसपीएमयू के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. अभय सागर मिंज को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘ग्लोबल अवॉर्ड’ मिलने जा रहा है। यह सम्मान बागमती यूनेस्को क्लब द्वारा उन विशेषज्ञों को दिया जाता है, जिन्होंने वंचित समुदायों और उनकी सांस्कृतिक विरासत को बचाने में असाधारण भूमिका निभाई हो।
डॉ. मिंज पिछले दो दशकों से आदिवासी अधिकारों, लुप्तप्राय भाषाओं और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने में जुटे हैं। उनकी पुस्तकों और शोध कार्यों ने वैश्विक मंच पर आदिवासी समाज की पहचान को नई ऊंचाई दी है।
प्रमुख योगदान
‘आदिवासी दर्पण’ और ‘21वीं सदी में आदिवासियत’ जैसी चर्चित पुस्तकें, लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रलेखन केंद्र का नेतृत्व, असुर जनजाति पर शोध को सरकारी मान्यता और
नेपाल और फिलीपींस में अंतरराष्ट्रीय सलाहकार की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण योगदान रहे हैं।
‘ग्लोबल अवॉर्ड’ क्या है?
‘ग्लोबल अवॉर्ड’ कोई एक सार्वभौमिक (single) पुरस्कार नहीं है, बल्कि यह नाम अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा दिए जाने वाले उन सम्मानों के लिए इस्तेमाल होता है, जो वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं को दिए जाते हैं। यह पुरस्कार Bagmati UNESCO Club द्वारा दिया जा रहा है।
किसे मिलता है यह अवॉर्ड?
यह सम्मान आमतौर पर उन लोगों को दिया जाता है जो:
समाज के वंचित और पारंपरिक समुदायों के उत्थान में काम करते हैं।
सांस्कृतिक विरासत (heritage) को संरक्षित करते हैं।
लुप्तप्राय भाषाओं और परंपराओं को बचाने में योगदान देते हैं।
शिक्षा, शोध, सामाजिक सेवा या मानवाधिकार के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय प्रभाव डालते हैं।
