Modi Strategy : वसुंधरा और वरुण गांधी का वनवास खत्म!

Bindash Bol

Modi Strategy : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बड़े मास्टर स्ट्रॉक से भाजपा  की राजनीति में बड़ा बदलाव होने वाला है। मोदी ने पिछले दिनों भाजपा में हाशिए पर धकेले गए दो प्रमुख नेताओं, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उत्तरप्रदेश के पीलीभीत से सांसद रहे गांधी परिवार के युवा नेता वरुण गांधी से सपरिवार मुलाकात की थी। मोदी की इस फैमिली पॉलिटिक्स के बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों का राजनीतिक वनवास जल्द खत्म होने वाला है। अब इन दोनों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के साथ वापसी होने वाली है।

इसके संकेत इस बात से भी मिलते हैं कि जिन वरुण गांधी ने हमेशा मोदी का विरोध ही किया, उनके सुर भी मुलाकात के बाद बदल गए। जाहिरा तौर पर यह मुलाकात मोदी के बुलावे पर हुई और इसके बाद वरुण ने मोदी को पितातुल्य तक कह दिया। इससे पहले वरुण ने मोदी की आलोचना करने का कोई मौका नहीं छोड़ा और यहां तक कि किसान आंदोलन के दौरान भी सरकार का विरोध करते हुए किसानों की मांगों का समर्थन किया। ऐसे में उनकी पहचान पार्टी में एक ‘डिसेंटिंग वॉइस’ के रूप में होने लगी थी। अब सुर बदले हैं तो यह बड़ा सियासी संकेत ही माना जाना चाहिए।

वसुंधरा ने हालांकि कभी मोदी-शाह के खिलाफ खुलकर कोई बयान नहीं दिया, लेकिन संकेतों में कई बार तंज कसे। ऐसे में उनकी गिनती कभी ‘डिसेंटिंग वॉइस’ के रूप में नहीं हुई। मोदी से मुलाकात के बाद उनके सुर भी बदले हुए हैं और वे मोदी की तारीफ का कोई मौका नहीं छोड़ रही। कल ही उन्होंने मोदी के सत्ता में रहने के 8931 दिन पूरे होने पर सोशल मीडिया पर उनका गुणगान किया है।

अब सवाल उठता है कि आखिर मोदी ने हाशिए पर धकेल दिए गए नेताओं को गले लगाने की नीति क्यों अपना ली है। क्या ये भाजपा में में बड़े रीस्ट्रक्चर की तैयारी है? क्या भाजपा आलाकमान को लगने लगा है कि प्रादेशिक क्षत्रपों की अनदेखी नुकसान पहुंचा सकती है? जानकारों की राय में ऐसा कुछ जरूर है, तभी ठुकराए हुए नेताओं को परिवार समेत बुलाकर नजदीकी बढाई जा रही है।

सबसे बड़ा संकेत है, टोन का बदलना। राजनीति में शब्द बहुत कुछ कहते हैं और जब आलोचक एक दूसरे की तारीफ करने लगे तो समझिए कहानी बदल चुकी है। यही कारण है कि अब सियासी गलियारों में वसुंधरा के साथ वरुण गांधी का वनवास खत्म होने के चर्चे जोरों पर हैं। वसुंधरा को फिलहाल यूपी का चुनाव प्रभारी बनाया जा सकता है और वरुण की जरुरत तो पश्चिम बंगाल चुनाव में है ही। उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में फिर अहम पद दिया जा सकता है।

इस विश्लेषण में जानिए-

– क्या है मोदी की हाल ही शुरू हुई फैमिली पॉलिटिक्स का राज

– क्यों बुलाया गया वसुंधरा और वरुण गांधी को परिवार के साथ

– क्या मोदी-शाह को हो गया है पुरानी गलतियों का अहसास

– क्या इसलिए ही पुराने मजबूत चेहरों को फिर से किया जा रहा है एक्टिव? इन सवालों के साथ भाजपा की अंदरूनी राजनीति का समूचा विश्लेषण।

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