Ram Navami : ऐसे थे हमारे राम

Bindash Bol

ध्रुव गुप्त
आईपीएस (पटना)

Ram Navami : रामनवमी हमारी संस्कृति के कुछ शिखर  पुरूषों में एक राम का जन्मदिन है। हमारी हजारों साल  लंबी सांस्कृतिक परंपरा में राम पहले व्यक्ति थे जिन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम कहा गया  है। जिनपर उनकी व्यक्तिगत विशिष्टताओं, उच्चतम जीवन-मूल्यों के आचरण और मर्यादित जीवन के लिए देवत्व आरोपित किया गया। प्राचीन से आजतक उनके व्यक्तित्व को सर्वोत्तम व्यक्तित्व, उनके द्वारा स्थापित जीवन-मूल्यों को श्रेष्ठतम जीवन -मूल्य और उनकी जनपक्षीय शासन-व्यवस्था को एक आदर्श शासन-व्यवस्था माना जाता रहा है। आधुनिक समय में उनके कुछ निर्णयों के लिए उन्हें कठघरे में भी खड़ा किया जाता रहा है। रावण की बहन शूर्पणखा का अपमान, निर्दोष सीता की अग्निपरीक्षा और परित्याग, वानरों के राजा बलि की छलपूर्वक हत्या उनके कुछ ऐसे ही विवादास्पद निर्णय हैं। ये सीमाएं राम की नहीं, तत्कालीन परिस्थितियों, मान्यताओं की थीं। अपनी तमाम करुणा और मानवीयता के बावज़ूद राजकीय मर्यादाओं में बंधे राम  उन सीमाओं के  पार नहीं जा सके। उनके बाद के द्वापर युग में आए कृष्ण ने अपने समय के सामाजिक, धार्मिक और नैतिक मूल्यों का बार-बार अतिक्रमण किया।  अपने युग के साथ नहीं चलकर उसे अपने इशारों पर नचाया। राम को आधुनिक विचारों के आलोक में परखने  के बजाय अगर उन्हें उनके समय के सापेक्ष देखा जाय तो इन कुछ विरोधाभासों को समझा जा सकता है।

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