Jharkhand : रामनवमी पर राममय हुई राजधानी, तपोवन मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

Sushmita Mukherjee

Jharkhand : रामनवमी के पावन अवसर पर झारखंड की राजधानी रांची पूरी तरह भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगी नजर आई। शुक्रवार सुबह से ही शहर के प्रमुख मंदिरों में राम भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर ओर “जय श्रीराम” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठा और पूरा शहर धार्मिक उत्साह से सराबोर दिखाई दिया।

सुबह से लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें

रामनवमी के शुभ मुहूर्त को देखते हुए श्रद्धालु अहले सुबह ही मंदिरों में पहुंचने लगे थे। खासकर तपोवन मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग—हर वर्ग के श्रद्धालु धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान श्रीराम और बजरंगबली की पूजा-अर्चना करते नजर आए। मंदिर परिसर में भक्ति, अनुशासन और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।

ऐतिहासिक आस्था का केंद्र है तपोवन मंदिर

डोरंडा क्षेत्र में स्थित तपोवन मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इसे राजधानी की ऐतिहासिक धरोहर भी माना जाता है। वर्षों पुरानी मान्यताओं के अनुसार यहां पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही वजह है कि हर वर्ष रामनवमी के दिन यहां श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ता है और मंदिर आस्था का मुख्य केंद्र बन जाता है।

सुबह की पूजा का विशेष महत्व

रामनवमी के दिन प्रातःकालीन पूजा को अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी परंपरा को निभाने के लिए रांची समेत आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों श्रद्धालु सुबह-सुबह मंदिर पहुंचे और भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया। भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा एवं व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए। स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं को कतारबद्ध दर्शन कराने में अहम भूमिका निभाई।

अखाड़ों की परंपरा ने बढ़ाया धार्मिक उत्साह

रामनवमी पर शहर के विभिन्न अखाड़ों की मौजूदगी ने उत्सव को और भव्य बना दिया। परंपरा के अनुसार देर रात तक अखाड़ों के जत्थे तपोवन मंदिर पहुंचते रहे, जहां पताका मिलन और पारंपरिक प्रदर्शन का आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक दृश्य को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग जुटे।

आस्था, परंपरा और उत्साह का संगम

रामनवमी के इस पावन पर्व पर रांची सच मायनों में राममय नजर आई। श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का ऐसा अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे शहर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। जयकारों, भजन-कीर्तन और भक्तों के उत्साह ने राजधानी को धार्मिक उत्सव में बदल दिया।

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