Global Economy : वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों को लेकर अक्सर उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, लेकिन इस बार जो हुआ उसने दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों और निवेशकों को चौंका दिया है. आर्थिक संकट से जूझ रहा तुर्की अचानक दुनिया का सबसे बड़ा सोना विक्रेता बनकर सामने आया है. महज दो हफ्तों में तुर्की के केंद्रीय बैंक ने करीब 58 टन सोना बेच डाला, जिसकी कीमत 8 अरब डॉलर से अधिक आंकी गई है. इस बड़े फैसले का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मार्केट पर दिखाई दिया.
दो हफ्ते में रिकॉर्ड बिकवाली
रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में लगभग 6 टन और 20 मार्च तक के सप्ताह में 52.4 टन सोना बाजार में उतारा गया. इतनी बड़ी बिक्री के बाद तुर्की का स्वर्ण भंडार घटकर करीब 513 टन रह गया, जो पिछले सात वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है.
बेचे गए सोने का बड़ा हिस्सा विदेशी स्वैप डील के जरिए अमेरिकी डॉलर जुटाने में इस्तेमाल किया गया, जबकि बाकी सोना खुले बाजार में बेचा गया. यह बिक्री इतनी बड़ी थी कि गोल्ड-समर्थित ईटीएफ से वैश्विक स्तर पर हुई कुल निकासी को भी पीछे छोड़ दिया.
आर्थिक संकट से निपटने की मजबूरी
तुर्की की गिरती मुद्रा ‘लीरा’ और बेकाबू महंगाई ने सरकार और केंद्रीय बैंक पर भारी दबाव बना दिया है. पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और महंगे ऊर्जा आयात ने डॉलर की मांग को तेजी से बढ़ा दिया है. लीरा को स्थिर रखने और बाजार में नकदी बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक को अपने स्वर्ण भंडार का सहारा लेना पड़ा.
बताया जा रहा है कि तुर्की का विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से घटकर लगभग 175 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया है, जो हाल के वर्षों का निचला स्तर माना जा रहा है.
क्या सस्ता होगा सोना?
इतनी बड़ी मात्रा में सोना बाजार में आने से वैश्विक सप्लाई बढ़ गई, जिसका असर तुरंत कीमतों पर पड़ा. लंदन स्पॉट मार्केट में सोने की कीमतें करीब 3 प्रतिशत तक फिसल गईं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा संकट और आर्थिक दबाव जारी रहा, तो तुर्की भविष्य में भी सोना बेच सकता है.
निवेशकों के लिए बड़ा संकेत
तुर्की की यह रणनीति सिर्फ एक देश का आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि वैश्विक बुलियन बाजार के लिए बड़ा संकेत है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले ऐसे फैसले ही तय करते हैं कि भारत जैसे देशों में आने वाले समय में सोना महंगा होगा या सस्ता.
