Paper Leak : देशभर में पेपर लीक के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए मोदी कैबिनेट ने शुक्रवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी। जंतर-मंतर पर छात्रों के जारी आंदोलन के बीच हुई कैबिनेट बैठक में इस अहम फैसले पर मुहर लगी।
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, पेपर लीक के दोषियों को 10 साल तक की सजा और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना हो सकेगा। साथ ही, ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट अनिवार्य होंगे, जिन्हें तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सोमवार को संसद के मानसून सत्र में यह विधेयक पेश करेंगे।
कैबिनेट बैठक में क्या हुआ?
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक पर कड़े कानून की आवश्यकता पर जोर दिया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रस्तावित संशोधन विधेयक की जानकारी मंत्रिमंडल को दी, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ सरकार की बातचीत की स्थिति से कैबिनेट को अवगत कराया।
मौजूदा कानून में क्या बदलाव होंगे?
वर्तमान कानून के तहत व्यक्तिगत मामलों में 3 से 5 साल की सजा और ₹10 लाख तक जुर्माना, जबकि संगठित अपराध में 5 से 10 साल की सजा और न्यूनतम ₹1 करोड़ जुर्माना का प्रावधान है।
संशोधन के बाद….
* पेपर लीक माफियाओं पर 10 साल तक की सजा।
* ₹10 करोड़ तक का जुर्माना।
* सभी मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में।
* 3 महीने के भीतर फैसला अनिवार्य।
* विधेयक का नोडल मंत्रालय डीओपीटी (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) होगा।
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि पेपर लीक कोई छोटी समस्या नहीं है। इससे लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून ला रही है और संसद से जल्द पारित कराने का प्रयास करेगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने सरकार के कदम को “बहुत कम और बहुत देर से उठाया गया फैसला” बताया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि केवल कानून लाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने, छात्रों से माफी मांगने और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करने वालों के खिलाफ कदम उठाने की मांग दोहराई।
जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है। हालांकि सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन CJP के नेतृत्व में आंदोलन जारी है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक धरना जारी रहेगा।