BokaroTreasuryScam : बोकारो ट्रेजरी घोटाला: असम से लौटते ही सरकार एक्शन मोड में, CM हेमंत सोरेन सख्त- हाईलेवल जांच शुरू

Madhukar Srivastava

* 7 लेयर का सुरक्षा चक्र ध्वस्त, ₹4.30 करोड़ की सेंधमारी से हिला प्रशासनिक तंत्र

BokaroTreasuryScam : झारखंड की ट्रेजरी व्यवस्था को झकझोर देने वाले बोकारो ट्रेजरी घोटाले पर राज्य सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में है। असम चुनावी दौरे से लौटते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हो गया है और पूरे वित्तीय सिस्टम की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। वित्त विभाग की ओर से देर शाम तक सभी विभागों और डीसी को ट्रेजरी से भुगतान के लिए नया दिशा निर्देश जारी किया जा सकता है।

सरकार अलर्ट मोड में: चीफ सेक्रेटरी की हाईलेवल बैठक

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के सीधे निर्देश पर चीफ सेक्रेटरी ने तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। सरकार की प्राथमिक कार्रवाई में शामिल हैं…

* वित्त विभाग की विशेष जांच टीम एक सप्ताह के भीतर बोकारो पहुंचेगी

* पूरी ट्रेजरी प्रणाली की तकनीकी और प्रशासनिक समीक्षा

* डिजिटल भुगतान और बिल पासिंग सिस्टम की सुरक्षा जांच

* संभावित राज्यव्यापी ऑडिट की तैयारी

सरकार इस मामले को सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सिस्टम फेलियर के रूप में देख रही है।

क्या है पूरा बोकारो ट्रेजरी घोटाला?

जांच में सामने आया है कि बोकारो ट्रेजरी से एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी उपेंद्र सिंह के नाम पर फर्जी वेतन बिल बनाकर करोड़ों रुपये की निकासी की गई।

* रिटायरमेंट: जुलाई 2016

* फर्जी निकासी अवधि: नवंबर 2023 से मार्च 2026

* कुल अवधि: 25 महीने

* ट्रांजैक्शन: 63 बार

* कुल राशि: ₹4,29,71,007 (लगभग ₹4.30 करोड़)


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रिटायरमेंट के 7 साल बाद भी सिस्टम में कर्मचारी सक्रिय दिखाया जाता रहा।

घोटाले का तरीका: डिजिटल सिस्टम से ही सिस्टम को मात

जांच में पता चला कि घोटाला बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया।

* कुबेर DDO बिल मैनेजमेंट सिस्टम में छेड़छाड़

* जन्मतिथि और बैंक विवरण बदले गए

* फर्जी वेतन बिल जेनरेट किए गए

* भुगतान नियमित वेतन की तरह पास होते रहे
हैरानी की बात — 7 लेयर की चेकिंग व्यवस्था (DDO, ट्रेजरी अधिकारी, बैंक वेरिफिकेशन सहित) भी इस धोखाधड़ी को पकड़ नहीं पाई।

आरोपी कौन और कैसे हुआ खुलासा?

आरोपी: कौशल पांडेय
पद: ट्रेजरी अकाउंटेंट (2018 से पदस्थ)
जांच में सामने आया…

* पत्नी अनु पांडेय के SBI खाते में ₹58 लाख

* आरोपी के खाते में ₹33 लाख जमा

* दोनों बैंक खाते तुरंत फ्रीज

* ट्रेजरी अधिकारी गुलाब चंद उरांव की शिकायत पर बोकारो स्टील सिटी थाना में FIR दर्ज की गई।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।  अब 2018 से अब तक उसके पूरे कार्यकाल की जांच जारी है।

बड़े सवाल जिनका जवाब बाकी

यह मामला केवल एक व्यक्ति की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे पर सवाल खड़ा कर रहा है…

* रिटायर कर्मचारी का नाम वर्षों तक सक्रिय कैसे रहा?

* सात स्तर की जांच प्रणाली पूरी तरह फेल क्यों हुई?

* क्या अन्य ट्रेजरी में भी इसी तरह के घोटाले चल रहे हैं?

* डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम की सुरक्षा कितनी भरोसेमंद है?

सरकार की नजर अब पूरे ट्रेजरी सिस्टम पर

राज्य सरकार अब इस घोटाले को उदाहरण बनाकर पूरे ट्रेजरी नेटवर्क की समीक्षा करने जा रही है। वित्त विभाग की रिपोर्ट आने के बाद बड़े प्रशासनिक फैसले, निलंबन या संरचनात्मक बदलाव संभव माने जा रहे हैं।
₹4.30 करोड़ की यह फर्जी निकासी केवल बोकारो ट्रेजरी का मामला नहीं रह गया है — यह झारखंड की वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन की विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
अब सबकी नजर उस रिपोर्ट पर है, जो एक सप्ताह बाद कई और बड़े खुलासे कर सकती है।

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