Himanta Biswa Sarma : असम विधानसभा चुनाव के मतदान से ठीक एक दिन पहले असम के मुख्यमंत्री और बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार हिमंत बिस्व सरमा का झारखंड दौरा राजनीतिक और आध्यात्मिक दोनों मायनों में चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव प्रचार समाप्त होते ही सरमा बुधवार को अचानक झारखंड के पवित्र शहर देवघर पहुंचे और बाबा वैद्यनाथ के दरबार में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
अचानक देवघर पहुंचने से बढ़ी सियासी उत्सुकता
मुख्यमंत्री सरमा गुवाहाटी से विशेष विमान द्वारा देवघर हवाई अड्डे पहुंचे। वहां से वे सीधे सत्संग आश्रम देवघर रवाना हुए, जहां कुछ समय प्रवास कर आश्रम के प्रधानाचार्य से मुलाकात की और आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके बाद वे कार से देश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा वैद्यनाथ धाम पहुंचे। मंदिर परिसर में उन्होंने भगवान शिव का अभिषेक और विशेष पूजा-अनुष्ठान किया। इस दौरान गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे भी उनके साथ मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार यह दौरा पूर्व निर्धारित नहीं था, जिससे राजनीतिक हलकों में इसे चुनाव पूर्व आध्यात्मिक शक्ति अर्जित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
असम में कल होगा मतदान
असम विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार मंगलवार शाम समाप्त हो चुका है और राज्य में गुरुवार, 9 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में मुख्यमंत्री का धार्मिक यात्रा पर जाना राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है और चुनावी दौर में नेताओं की यहां मौजूदगी अक्सर राजनीतिक संदेश भी देती है।
असम से सत्संग आश्रम का विशेष जुड़ाव
बताया जाता है कि सत्संग आश्रम के हजारों अनुयायी असम के विभिन्न जिलों में रहते हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा भी लंबे समय से आश्रम से जुड़े माने जाते हैं। उन्होंने आश्रम प्रमुख ‘बुबाई दा’ से मुलाकात कर आध्यात्मिक मार्गदर्शन लिया।
पवन खेड़ा विवाद पर साधी चुप्पी
हाल के दिनों में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के साथ चल रहे तीखे राजनीतिक विवाद पर जब देवघर एयरपोर्ट पर मीडिया ने सवाल पूछे, तो सरमा ने कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया और सीधे अपने कार्यक्रम की ओर बढ़ गए।
चुनाव में नई चुनौती: JMM की एंट्री
इस बार असम चुनाव में झारखंड की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा भी मैदान में है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वहां अपने उम्मीदवारों के समर्थन में व्यापक प्रचार अभियान चलाया, जिससे चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है।
आस्था, रणनीति और चुनावी समीकरण—मतदान से ठीक पहले हिमंत बिस्व सरमा का देवघर दौरा अब राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का बड़ा विषय बन चुका है। नजरें अब 9 अप्रैल की वोटिंग और उसके नतीजों पर टिकी हैं।