Jharkhand Hindi Sahitya Manch : साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति के संगम के रूप में झारखण्ड हिंदी साहित्य संस्कृति मंच की मासिक काव्यगोष्ठी रविवार को लालपुर स्थित होटल सिटी पैलेस में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुई। मंच के कार्यकारी अध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव की अध्यक्षता में संपन्न इस आयोजन में कवियों और साहित्यकारों ने अपनी सशक्त रचनाओं के माध्यम से समकालीन जीवन, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और भावनात्मक अनुभूतियों को प्रभावी स्वर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती को पुष्पांजलि अर्पित करने, दीप प्रज्ज्वलन तथा मंच की उपाध्यक्ष डॉ. सुरिन्दर कौर ‘नीलम’ द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मंच की कार्यकारिणी सदस्य डॉ. ममता मनीष सिन्हा ने कुमकुम-अक्षत से सभी आगंतुक कवियों, कवयित्रियों एवं साहित्यप्रेमियों का आत्मीय स्वागत किया।
स्वागत भाषण में मंच के सचिव बिनोद सिंह गहरवार ने उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए मंच के संरक्षक विनय सरावगी, अध्यक्ष कामेश्वर प्रसाद ‘निरंकुश’ तथा आयोजन स्थल उपलब्ध कराने के लिए होटल सिटी पैलेस के स्वामी विजय रजगढ़िया के प्रति आभार व्यक्त किया।
काव्यपाठ सत्र गोष्ठी का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसमें प्रतिभा सिंह, डॉ. अंजेश कुमार, डॉ. गीता सिन्हा ‘गीतांजलि’, आत्मेश्वर झा, राज रामगढ़ी, खुशबू बरनवाल ‘सीपी’, हिमकर श्याम, कामेश्वर कुमार सिंह ‘कामेश’, सुनीता अग्रवाल, डॉ. ममता मनीष सिन्हा, रेणु झा ‘रेणुका’, बिनोद सिंह गहरवार, मुक्ति शाहदेव, डॉ. सुरिन्दर कौर ‘नीलम’, आसित कुमार, नेहाल हुसैन सैरायवी तथा डॉ. वैद्यनाथ मिश्र ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। विविध विषयों और भावों से समृद्ध इन प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया और खूब सराहना बटोरी।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि कवि होना अपने आप में सौभाग्य का विषय है। कविता साहित्य की सबसे प्राचीन, जीवंत और प्रभावशाली विधा है, जो मनुष्य को संकीर्ण सोच से ऊपर उठाकर व्यापक मानवीय चेतना और आत्ममुक्ति की ओर प्रेरित करती है। उन्होंने कविता की भाषा और उसकी अभिव्यक्ति पर विचार रखते हुए संस्कृत के महान गद्यकार वाणभट्ट और उनके पुत्रों से जुड़ा एक रोचक प्रसंग साझा किया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी रचना का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गोष्ठी में विजय रजगढ़िया, डॉ. वी.के. सहाय, गुरुकमल सिंह जगदेव, कमलेश्वर प्रसाद, शिवचन्द्र प्रसाद, निरंजन कुमार श्रीवास्तव एवं विशाल कुमार सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन मंच के संयुक्त सचिव डॉ. वैद्यनाथ मिश्र ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन मंच के उपाध्यक्ष आसित कुमार ने प्रस्तुत किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर निरंजन कुमार श्रीवास्तव, राज रामगढ़ी एवं विशाल कुमार ने झारखण्ड हिंदी साहित्य संस्कृति मंच की स्थायी सदस्यता ग्रहण कर मंच की साहित्यिक यात्रा से औपचारिक रूप से जुड़ने की घोषणा की। साहित्य और संस्कृति के प्रति समर्पित इस आयोजन ने रचनाकारों एवं साहित्यप्रेमियों के बीच एक नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।