Islamabad Summit : मध्य-पूर्व में हालात फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक खींचतान अब सीधे टकराव की तरफ जाती दिख रही है। एक तरफ ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता, तब तक वह अमेरिका से बातचीत नहीं करेगा, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर डील नहीं हुई तो सैन्य कार्रवाई भी की जा सकती है। इसी बीच दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, जहां एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक होने वाली है।

लेबनान सीजफायर बना बातचीत की सबसे बड़ी शर्त
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत की शुरुआत तभी होगी जब लेबनान में पूर्ण सीजफायर लागू होगा। इसके साथ ही ईरान ने अपने फ्रीज किए गए फंड वापस करने की भी मांग रखी है। ईरान का कहना है कि बिना इन शर्तों को पूरा किए किसी भी तरह की बातचीत का कोई मतलब नहीं है। ईरान का रुख साफ है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन पहले उसे अपने अधिकारों की गारंटी चाहिए।
इस्लामाबाद में हाई-लेवल डिप्लोमैटिक मीटिंग की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान और अमेरिका दोनों के डेलीगेशन इस समय पाकिस्तान के इस्लामाबाद में मौजूद हैं। यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर कई बड़े मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता में अमेरिकी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। पाकिस्तान की तरफ से भी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर और अन्य शीर्ष अधिकारी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

सीजफायर डील में शामिल होने वाले प्रमुख प्रतिनिधा…
पाकिस्तान: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आसिम मलिक।
अमेरिका: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्पेशल प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ, सीनियर एडवाइजर जेरेड कुशनर, सैन्य अधिकारी ब्रैड कूपर।
ईरान: संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, मजीद उप विदेश मंत्री तख्त खांची।
अमेरिका की सख्त चेतावनी और ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं होता है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों को अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया जा रहा है। ट्रंप ने भरोसा जताया कि होर्मुज स्ट्रेट जल्द खुल सकता है, चाहे ईरान सहयोग करे या नहीं। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

बातचीत के बड़े मुद्दे क्या हैं?
इस वार्ता में चार बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है..
ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे और परमाणु गतिविधियां सीमित हों
होर्मुज स्ट्रेट: ईरान इस पर नियंत्रण और शुल्क चाहता है, जबकि अमेरिका इसे पूरी तरह खुला रखना चाहता है
मिसाइल प्रोग्राम: अमेरिका लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक लगाना चाहता है
सैंक्शंस और फंड: ईरान सभी प्रतिबंध हटाने और फ्रीज फंड वापस करने की मांग कर रहा है।
वैश्विक संगठनों की नजर और शांति की अपील
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस वार्ता को बेहद अहम बताया है और दोनों देशों से अपील की है कि इसे सफल बनाया जाए। UN प्रमुख ने कहा कि यह तनाव कम करने का बड़ा मौका है जिसे गंवाना नहीं चाहिए। यूरोपीय संघ (EU) ने भी मध्य-पूर्व के अन्य मुद्दों पर चिंता जताई है और इजराइल की नई बस्तियों की योजना को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है।
बढ़ता तनाव, बढ़ती उम्मीदें
एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसे हालात बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें भी बनी हुई हैं। पाकिस्तान में होने वाली यह बैठक आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व की दिशा तय कर सकती है-शांति की ओर या फिर नए संघर्ष की तरफ। दुनिया की नजर अब इस्लामाबाद में होने वाली इस ऐतिहासिक वार्ता पर टिकी है, जो या तो बड़ा समझौता ला सकती है या फिर तनाव को और बढ़ा सकती है।