* सीएम की नाराजगी: “राज्य की साख से समझौता नहीं”
Treasury Scam : झारखंड के बोकारो से सामने आए ट्रेजरी वेतन निकासी घोटाले ने सिर्फ एक जिले नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सरकार एक्शन मोड में है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को सीधे हाईलेवल जांच के दायरे में ला दिया है। शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन में बुलाई गई मैराथन बैठक में सीएम ने मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (गृह), डीजीपी और वित्त सचिव के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में मुख्यमंत्री की नाराजगी साफ झलकी। उन्होंने कहा— “सरकार किसी भी दोषी को बख्शेगी नहीं।”
सीएम के निर्देश पर वित्त विभाग ने अब सीआईडी जांच का प्रस्ताव सीएमओ को भेज दिया है। साथ ही महालेखाकार (एजी) से पूरे राज्य की सभी ट्रेजरी और एसपी कार्यालयों का स्पेशल ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही आदेश जारी हो जाएगा। डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी को एक सप्ताह के अंदर अपने कार्यालयों में हुई निकासी की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
1. CID जांच का आदेश… ट्रेजरी घोटाले की जांच सीआईडी (CID) से होगी। मुख्यमंत्री का अप्रूवल मिलते ही आदेश जारी हो जाएगा।
2. स्पेशल ऑडिट का जाल … अब सिर्फ बोकारो नहीं, बल्कि राज्य के सभी ट्रेजरी और एसपी कार्यालयों का महालेखाकार (AG) से स्पेशल ऑडिट कराया जाएगा।
3. एक हफ्ते का अल्टीमेटम..
डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी को एक सप्ताह
बिंदास बोल न्यूज़ में वेडनेसडे को “असम से लौटते ही सरकार एक्शन मोड में, सीएम हेमंत सोरेन सख्त’ हेडिंग से खबर छपी थी।

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‘बिंदास बोल’ की खबर पर लगी मुहर
जिस घोटाले को पहले सिर्फ एक प्रशासनिक गड़बड़ी माना जा रहा था, अब वही राज्यस्तरीय वित्तीय संकट का संकेत बनता दिख रहा है।
बिंदास बोल न्यूज़ द्वारा उठाए गए सवालों के बाद सरकार ने आधिकारिक रूप से कार्रवाई शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट भवन में मैराथन समीक्षा बैठक बुलाई
वरिष्ठ नौकरशाही और पुलिस नेतृत्व को तलब किया गया
और साफ संदेश दिया गया — “दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा।”
सीएम की नाराजगी: “राज्य की साख से समझौता नहीं”
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा…
जांच का दायरा बढ़ाया जाए
जिम्मेदारी तय हो
वित्तीय अनुशासन पर जीरो टॉलरेंस अपनाया जाए
यह संदेश सिर्फ अधिकारियों को नहीं, पूरे प्रशासनिक ढांचे को दिया गया है।
बढ़ता दायरा: क्या यह पूरे राज्य का संकट है?
जैसे-जैसे जांच की आंच तेज हो रही है, गबन की राशि का आंकड़ा भी आसमान छू रहा है।अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि बोकारो और हजारीबाग से ही सिर्फ 41 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी की गई है। आशंका इस बात की भी है कि कहीं बोकारो तो सिर्फ एक ‘ट्रेलर’ भर न हो? क्या राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह की ‘समानांतर व्यवस्था’ चल रही है?
प्रशासन पर उठते सवाल
यह घोटाला सिर्फ बोकारो या हजारीबाग तक सीमित नहीं लग रहा। एसपी कार्यालय के अकाउंटेंट से लेकर पुलिसकर्मियों तक की भूमिका सामने आ रही है। बोकारो में एक सेवानिवृत्त हवलदार/दारोगा के नाम पर फर्जी निकासी, हजारीबाग में तीन सिपाहियों की गिरफ्तारी, पत्नियों के बैंक खातों में ट्रांसफर—ये सब सिस्टम की गहरी सड़ांध को उजागर कर रहे हैं।
झारखंड में ट्रेजरी घोटाले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। बोकारो ट्रेजरी से शुरू हुआ यह सनसनीखेज मामला अब पूरे राज्य के कोषागारों और एसपी कार्यालयों तक फैलता जा रहा है। फर्जी वेतन निकासी, जन्मतिथि में छेड़छाड़, सेवानिवृत्त कर्मियों को सक्रिय दिखाकर करोड़ों की अवैध निकासी—ये सब मिलकर सरकारी खजाने को लूटने की एक संगठित साजिश की ओर इशारा कर रहे हैं।