Pushpa Case : बोकारो से लापता लड़की पुष्पा के नरकंकाल पर सवाल! HC सख्त, DGP, SP, SIT, FSL डायरेक्टर तलब

Bindash Bol

* पुष्पा गुमशुदगी मामला: ‘इंसाफ का कंकाल’ या पुलिसिया लापरवाही? हाईकोर्ट के तीखे सवालों से थर्राया प्रशासन

Pushpa Case : झारखंड की न्यायपालिका ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस की कछुआ चाल और फाइलों में दबी जांच अब स्वीकार्य नहीं होगी। बोकारो की 18 वर्षीय पुष्पा कुमारी की गुमशुदगी और फिर संदिग्ध नरकंकाल मिलने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के आला अधिकारियों की क्लास लगा दी है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने न केवल जांच की रफ्तार पर सवाल उठाए, बल्कि पूरी मशीनरी को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

कोर्ट की तल्खी: “डीएनए जांच में इतनी देरी क्यों?”

​बुधवार की सुनवाई किसी कानूनी प्रक्रिया से कहीं अधिक पुलिसिया कार्यप्रणाली पर एक “चार्जशीट” जैसी थी। कोर्ट ने कड़े लहजे में पूछा कि जब कंकाल बरामद हो चुका था, तो अब तक DNA टेस्ट क्यों नहीं कराया गया? क्या प्रशासन किसी चमत्कार का इंतजार कर रहा था या सबूतों के मिटने का?
​अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जांच का यही ढर्रा रहा, तो मामला CBI को सौंपने में देर नहीं की जाएगी।

जांच पर उठते 3 बड़े सुलगते सवाल

​प्रार्थी के अधिवक्ताओं ने जो दलीलें पेश कीं, वे जांच की कहानी में बड़े झोल की ओर इशारा करती हैं….

* दुर्गंध का रहस्य: जिस स्थान से नरकंकाल मिला, वह आम आवाजाही वाला इलाका है। अधिवक्ताओं का तर्क है कि यदि वहां शव सड़ रहा था, तो आसपास के लोगों को बदबू क्यों नहीं आई? क्या कंकाल वहां बाद में प्लांट किया गया?

* कंकाल की उम्र: आशंका जताई जा रही है कि बरामद हड्डियाँ पुष्पा की न होकर काफी पुरानी हो सकती हैं। क्या पुलिस केस बंद करने की जल्दबाजी में है?

* सैंपल में सुस्ती: कोर्ट ने हैरानी जताई कि अब तक माता-पिता के डीएनए सैंपल लेने और मिलान करने की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई?

एक्शन मोड में कोर्ट: DGP और SP तलब

​सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है। अदालत ने निम्नलिखित अधिकारियों को गुरुवार सुबह 10:30 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का फरमान सुनाया है…

​DGP (झारखंड)
​SP (बोकारो)
​FSL डायरेक्टर
​SIT के सदस्य

“लापरवाही की इंतहा”

इस मामले में पिंड्राजोरा थाना प्रभारी समेत 18 पुलिसकर्मियों का निलंबन यह साबित करने के लिए काफी है कि जमीन पर खाकी ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा था। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ निलंबन पुष्पा के परिवार को न्याय दिला पाएगा?

पृष्ठभूमि: 31 जुलाई से न्याय का इंतजार

​पुष्पा कुमारी 31 जुलाई 2025 से लापता है। उसकी मां रेखा देवी ने जब हार मान ली, तब उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की। आज स्थिति यह है कि आरोपी दिनेश कुमार सलाखों के पीछे तो है, लेकिन पुष्पा जीवित है या उसकी हत्या हो चुकी है, यह अब भी एक रहस्यमयी पहेली बना हुआ है।

गुरुवार की सुनवाई झारखंड पुलिस के लिए अग्निपरीक्षा होगी। क्या पुलिस कोर्ट को वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ संतुष्ट कर पाएगी या फिर मामला राज्य के हाथों से निकलकर केंद्रीय जांच एजेंसी के पास जाएगा? पूरी नजर अब कल सुबह 10:30 बजे पर टिकी है।

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