Parliament Special Session : भारत सरकार ने संसद के विशेष सत्र (16-18 अप्रैल 2026) में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 समेत तीन प्रमुख बिल पेश करने की तैयारी कर ली है। यह बिल लोकसभा की सांसद संख्या (आकार) को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव करता है। साथ ही नए परिसीमन (delimitation) और महिलाओं के 33% आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने का रास्ता साफ करेगा। यह बदलाव 1976 (42वें संशोधन) से चली आ रही सीट-फ्रीज (1971 जनगणना आधारित) को हटाएगा।
1. सांसद का आकार (संख्या) और प्रकार कितना बदल जाएगा?
* मौजूदा स्थिति: लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें (530 राज्य + 13 केंद्र शासित प्रदेश)। संवैधानिक अधिकतम सीमा 550 थी।
* प्रस्तावित बदलाव (अनुच्छेद 81 में संशोधन):
* कुल सांसद: 850 (अधिकतम)
* राज्यों से: 815
* केंद्र शासित प्रदेशों से: 35
यह सीटें जनसंख्या के आधार पर नए परिसीमन आयोग द्वारा तय होंगी।
प्रकार में बदलाव…
* महिला आरक्षण: कुल सीटों में 33% (लगभग 283 सीटें) महिलाओं के लिए आरक्षित। यह रोटेशन आधार पर हर चुनाव में बदलेगा। SC/ST महिलाओं के लिए भी उप-आरक्षण का प्रावधान।
* SC/ST आरक्षण: नए परिसीमन के बाद जनसंख्या अनुपात में तय होगा (प्रभावित नहीं होगा)।
* नए निर्वाचन क्षेत्र: सीमाएं redraw होंगी – भौगोलिक, प्रशासनिक और जनसंख्या को ध्यान में रखकर। उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे बड़े राज्यों को ज्यादा सीटें मिल सकती हैं, जबकि दक्षिणी राज्यों को अनुपात कम हो सकता है।
यह बदलाव 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होने की संभावना है। राज्य विधानसभाओं की सीटों की ऊपरी सीमा 500 बनी रहेगी, लेकिन कुछ राज्यों में परिसीमन से संख्या बढ़ सकती है।
2. कौन-कौन से बिल पेश किए जाएंगे?
सरकार तीन बिल एक साथ पेश कर रही है (विशेष सत्र में 16 अप्रैल से चर्चा)…
1.संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 → लोकसभा सीटें 850, अनुच्छेद 81 और जनसंख्या की परिभाषा में बदलाव।
2.परिसीमन विधेयक, 2026 → नया Delimitation Commission गठन (अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट जज, सदस्य: मुख्य चुनाव आयुक्त आदि)। आयोग के फैसले अंतिम और अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
3.केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 → दिल्ली, पुडुचेरी, जम्मू-कश्मीर आदि UT विधानसभाओं में समन्वय और आरक्षण लागू।
ये तीनों बिल महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को बिना 2026 जनगणना इंतजार के लागू करने के लिए जरूरी हैं।
3. सरकार की राय क्या है?
सरकार (मोदी सरकार) का तर्क…
* 1971 जनगणना अब पुरानी हो चुकी है। शहरीकरण, प्रवास और आबादी के बदलाव को ध्यान में रखना जरूरी है।
* लोकतंत्र को अधिक समावेशी और जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व देना।
* महिला आरक्षण को तुरंत लागू करना – “लोकतंत्र की आधी आबादी” को सशक्त बनाना।
* बेहतर जनसंख्या नियंत्रण वाले राज्यों को भविष्य में नुकसान न हो (परिसीमन से प्रोत्साहन)।
* कुल मिलाकर, संसद की क्षमता बढ़ाना और राष्ट्र की वर्तमान वास्तविकता से जोड़ना।
सरकार इसे “ऐतिहासिक सुधार” बता रही है जो 50 साल बाद पहली बार बड़े पैमाने पर सीट पुनर्वितरण करेगा।
4. विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?
विपक्ष (कांग्रेस, DMK, AAP, RJD, TMC आदि) का मुख्य विरोध…
* उत्तर vs दक्षिण विभाजन: दक्षिणी राज्य (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र) ने जनसंख्या नियंत्रण बेहतर किया, लेकिन 2011 जनगणना (या पुराने आंकड़ों) से परिसीमन होने पर उन्हें कम अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। उत्तर (UP, बिहार) को ज्यादा फायदा → दक्षिण की राजनीतिक ताकत कम होगी।* जनगणना पर विवाद: 2021 की नई जनगणना की मांग। 2011 डेटा पुराना है।
* जनगणना पर विवाद: 2021 की नई जनगणना की मांग। 2011 डेटा पुराना है।
* OBC/SC/ST महिलाओं के लिए “कोटा विथिन कोटा” स्पष्ट नहीं।
* राजनीतिक मकसद: BJP का उत्तर में मजबूत आधार → बिल पास होने से सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है।
* समय और तरीका: विधानसभा चुनावों से ठीक पहले विशेष सत्र बुलाना। संवैधानिक संशोधन के लिए 2/3 बहुमत चाहिए (लोकसभा में ~362 वोट), इसलिए विपक्ष समर्थन की शर्तें रख सकता है।
विपक्ष इसे “महिला आरक्षण की आड़ में सीटों का नया बंटवारा” बता रहा है। TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने पूछा – “बिल की कॉपी कहां है?”
क्या होगा आगे?
* अगर बिल पास हुआ → 2029 चुनाव में 850 सांसद, 33% महिलाएं, नई सीटें और नए चुनाव क्षेत्र।
* यह भारत की लोकतांत्रिक संरचना को पूरी तरह बदल देगा – उत्तर की ताकत बढ़ेगी, लेकिन दक्षिण-पश्चिम-पूर्वोत्तर में असंतोष भी।
* पास होने के लिए विपक्ष का समर्थन जरूरी, इसलिए सौदेबाजी हो सकती है। यह बदलाव भारत की राजनीति, संघीय ढांचे और प्रतिनिधित्व को नई दिशा देगा।