Census 2027 : जनगणना 2027 की ऐतिहासिक शुरुआत: आज से 8 राज्यों में घर-घर डिजिटल सर्वे!

Bindash Bol

* 16 साल बाद दस्तक! जनगणना 2027 का पहला चरण शुरू, 33 सवालों से बदलेगा देश का भविष्य

* डिजिटल क्रांति की शुरुआत: जनगणना 2027 में स्व-गणना से घर बैठे गिनती, 8 राज्यों में आज घर-घर अभियान

* भारत गिन रहा अपना भविष्य: जनगणना 2027 का भव्य सफर शुरू, पहली बार पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी

Census 2027 : लंबे इंतजार के बाद जनगणना प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है, जिसमें आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घर-घर जाकर डेटा एकत्र किया जा रहा है। यह जनसांख्यिकीय जानकारी भविष्य के परिसीमन और आरक्षण नीतियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है और देश की नीति-निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित करेगी।

भारत की जनगणना 2027 का ऐतिहासिक सफर आज से शुरू हो गया है। लंबे इंतजार के बाद (2011 के बाद 16 साल का अंतराल) दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से चरणबद्ध तरीके से शुरू हुई है। आज 16 अप्रैल 2026 को आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घर-घर सर्वे अभियान (House Listing and Housing Census) की मुख्य प्रक्रिया दस्तक दे रही है।

जनगणना 2027: एक नजर में

यह भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना है। अनुमानित रूप से 1.4 अरब से अधिक लोगों की गिनती होगी। यह पूरी तरह डिजिटल होगी — पहली बार मोबाइल ऐप, ऑनलाइन स्व-गणना (Self-Enumeration) और डिजिटल डेटा कैप्चर का इस्तेमाल हो रहा है।
दो चरणों में पूरी प्रक्रिया…

* पहला चरण (House Listing & Housing Census – HLO): अप्रैल से सितंबर 2026 तक — मकानों की सूचीकरण, आवास की स्थिति, सुविधाएं और परिवार की बुनियादी जानकारी।

* दूसरा चरण (Population Enumeration): फरवरी 2027 में — विस्तृत जनसंख्या गणना (संदर्भ तिथि: 1 मार्च 2027)।

पहले चरण में 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो मकान की संरचना, पानी-बिजली-शौचालय जैसी सुविधाओं, ईंधन, मोबाइल-इंटरनेट, वाहन, संपत्ति और परिवार की स्थिति से जुड़े हैं। यह डेटा जीवन स्तर, शहरीकरण और बुनियादी ढांचे का आकलन करेगा।

आज से शुरू: आठ राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

स्व-गणना (1-15 अप्रैल) के बाद आज 16 अप्रैल से इनमें घर-घर सर्वे शुरू हो रहा है…

* अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

* गोवा

* कर्नाटक

* लक्षद्वीप

* मिजोरम

* ओडिशा

* सिक्किम

* दिल्ली (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली छावनी बोर्ड क्षेत्र)

अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया चरणबद्ध रूप से शुरू होगी (उदाहरण: उत्तराखंड में 25 अप्रैल से, बिहार में 2 मई से आदि)। प्रत्येक राज्य में लगभग 30 दिन का घर-घर अभियान चलेगा।

नई बातें: डिजिटल क्रांति और जाति गणना

* स्व-गणना सुविधा: नागरिक se.census.gov.in पोर्टल पर 16 भाषाओं में खुद अपनी जानकारी भर सकते हैं (मोबाइल नंबर और बुनियादी क्रेडेंशियल से)। इससे समय बचेगा और सटीकता बढ़ेगी।

* पहली बार जाति जनगणना: 1931 के बाद लगभग 90-95 साल बाद जाति आधारित डेटा भी शामिल होगा, जो सामाजिक न्याय, आरक्षण और नीति-निर्माण के लिए अहम होगा।

* लाइव-इन रिलेशनशिप: पहली बार ऐसे जोड़ों को भी अलग से मान्यता मिलेगी।

* डिजिटल फर्स्ट: डेटा तुरंत कैप्चर होने से कुछ आंकड़े 2027 में ही उपलब्ध हो सकते हैं, जबकि पहले इसमें साल लगते थे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना?

यह सिर्फ आबादी की गिनती नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है….

* परिसीमन (Delimitation): लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का पुनर्निर्धारण।

* आरक्षण नीतियां: जाति, महिला आरक्षण आदि के लिए डेटा आधार।

* विकास योजनाएं: शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, बुनियादी सुविधाओं की योजना बनाने में मदद।

* आर्थिक-सामाजिक विश्लेषण: शहरीकरण, प्रवासन, शिक्षा स्तर, डिजिटल डिवाइड आदि का सही चित्र।

लगभग 30 लाख से अधिक कर्मचारी (मुख्यतः शिक्षक और सरकारी अधिकारी) इस महाअभियान में शामिल हैं। गलत जानकारी देने पर कानूनी दंड का प्रावधान भी है।

नागरिकों की भूमिका

* स्व-गणना पोर्टल पर खुद जानकारी भरें तो प्रगणक के आने पर सिर्फ सत्यापन होगा।

* सही और पूर्ण जानकारी दें — यह आपका अधिकार भी है और देश के विकास में योगदान भी।

* प्रगणक आधिकारिक आईडी साथ लेकर आएंगे।

जनगणना 2027 भारत को 21वीं सदी की चुनौतियों और अवसरों की सटीक तस्वीर देगी। यह डेटा-आधारित शासन, समावेशी विकास और बेहतर भविष्य की दिशा तय करेगी।
लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई यह प्रक्रिया न केवल आंकड़ों का संग्रह है, बल्कि एक राष्ट्र की सामूहिक तस्वीर को फिर से उकेरने का मौका है। जागरूक नागरिकों की भागीदारी से यह अभियान और अधिक सफल होगा।

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