सवाल पूछा… और टूट पड़े सत्ता के गुर्गे! झारखंड में पत्रकारिता पर हमला या लोकतंत्र की हत्या?
मंत्री के सामने पत्रकार की पिटाई — क्या हेमंत सरकार में सच बोलना अब जुर्म बन गया है?
कैमरे के सामने लोकतंत्र लहूलुहान! मंत्री मौन, पुलिस खामोश और पत्रकार पर हमला
सवाल से बौखलाई सत्ता?
हजारीबाग में मंत्री समर्थकों की गुंडागर्दी ने खोली सिस्टम की पोल
“साहब, सवाल मुआवजे का था, पर आपने तो पत्रकार का खून ही बहा दिया!”
Jharkhand : झारखंड में सत्ता के नशे में चूर नेताओं और उनके गुर्गों ने सारी मर्यादाएं ताक पर रख दी हैं। क्या अब प्रदेश में सच बोलना या सवाल पूछना अपराध हो गया है? ताजा मामला हजारीबाग का है, जहां स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के सामने उनके समर्थकों ने एक पत्रकार की सिर्फ इसलिए बेरहमी से पिटाई कर दी क्योंकि उसने जनता से जुड़े मुद्दे पर सवाल पूछने की ‘जुर्रत’ की थी।
घटना का काला सच: जब रक्षक ही बन गए भक्षक
घटना मंगलवार की है जब मंत्री इरफान अंसारी हजारीबाग में शोक संतप्त एक परिवार से मिलने पहुंचे थे। मीडिया से बात करते समय जब पत्रकार सुशांत सोनी ने आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते उनसे चतरा एयर एंबुलेंस हादसे और पीड़ितों को अब तक मुआवजा न मिलने पर सवाल किया, तो मंत्री जी और उनके समर्थकों का पारा चढ़ गया।
बड़ा सवाल: क्या एक मंत्री से उसकी जिम्मेदारी पर सवाल पूछना गुनाह है? क्या जनता के टैक्स से वेतन लेने वाले मंत्री जवाबदेही से इतने डरते हैं कि हिंसा का सहारा लेने लगे?
पुलिस और मंत्री की मौजूदगी में ‘तालिबानी’ सलूक
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पत्रकार की पिटाई किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि खुद मंत्री इरफान अंसारी और पुलिस बल की मौजूदगी में हुई। वीडियो साक्ष्यों के अनुसार, जब समर्थक पत्रकार को पीट रहे थे, तब न तो मंत्री ने उन्हें रोका और न ही वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव की जहमत उठाई।
सवाल: क्या झारखंड पुलिस अब आम जनता की रक्षा के बजाय मंत्रियों के गुंडों को संरक्षण देने के लिए खड़ी रहती है?
सवाल: अपनी आंखों के सामने एक निर्दोष पत्रकार को पिटता देख मंत्री अंसारी मौन क्यों रहे? क्या यह हमला उनके इशारे पर हुआ था?
बाबूलाल मरांडी का तीखा प्रहार: “राजनीति छोड़कर घर बैठें मंत्री”
इस घटना के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरते हुए सीधे कार्रवाई की मांग की है। मरांडी ने दो टूक कहा….
”यदि आपके मंत्री को जनता के सवाल चुभ रहे हैं, तो उन्हें सलाह दें कि राजनीति छोड़कर घर बैठ जाएं। पत्रकारों के साथ मारपीट को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
मरांडी ने हजारीबाग पुलिस से मांग की है कि इरफान अंसारी की ‘बदमिजाजी’ का इलाज जरूरी है और उन पर तुरंत केस दर्ज कर गिरफ्तारी की जानी चाहिए।
जनता के बीच चर्चा के ज्वलंत बिंदु….
अभिव्यक्ति की आजादी का कत्ल: अगर आज एक पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो कल सवाल पूछने वाली आम जनता का क्या होगा?
सरकार की चुप्पी: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने मंत्री की इस ‘गुंडागर्दी’ पर चुप क्यों हैं? क्या यह चुप्पी हमले को मौन समर्थन है?
न्याय की मांग: घायल पत्रकार सुशांत सोनी अस्पताल में भर्ती हैं। क्या प्रशासन हमलावर समर्थकों और मूकदर्शक बने पुलिसवालों पर कड़ी कार्रवाई करने की हिम्मत दिखाएगा?
यह हमला सिर्फ सुशांत सोनी पर नहीं, बल्कि राज्य की समूची पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। अगर आज इस अहंकारी तंत्र के खिलाफ आवाज नहीं उठाई गई, तो झारखंड में ‘जंगलराज’ को हावी होने से कोई नहीं रोक पाएगा।