Bengal Election 2026 : पश्चिम बंगाल की सत्ता का भविष्य अब ईवीएम (EVM) में कैद हो चुका है। 2026 का यह विधानसभा चुनाव न केवल बंगाल, बल्कि देश की राजनीति के लिए सबसे निर्णायक माना जा रहा है। हिंसा की छिटपुट खबरों और ‘एसआईआर’ (SIR) जैसे विवादों के बीच जनता ने जिस तरह से बढ़-चढ़कर मतदान किया है, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है।
आज, यानी 4 मई को जब मतपेटियां खुलेंगी, तो साफ हो जाएगा कि ममता बनर्जी की हैट्रिक के बाद चौथी पारी शुरू होगी या भाजपा पहली बार कोलकाता के ‘नवान्न’ पर भगवा फहराएगी। आइए डालते हैं इस चुनाव की 10 सबसे अहम बातों पर एक नजर…..
1. रिकॉर्ड मतदान: लोकतंत्र का नया कीर्तिमान
इस बार बंगाल की जनता ने वोटिंग के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। पहले चरण में 152 सीटों पर करीब 93% और दूसरे चरण की 142 सीटों पर लगभग 90% मतदान हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतना भारी मतदान हमेशा किसी बड़े बदलाव या किसी एक दल के पक्ष में प्रचंड लहर। की ओर इशारा करता है।
2. SIR विवाद: 90 लाख नामों पर रार
चुनाव से पहले ‘विशेष सघन संशोधन’ (Special Intensive Revision – SIR) सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा। मतदाता सूची से लगभग 90.83 लाख नाम हटाए गए। चुनाव आयोग ने इसे प्रक्रिया का हिस्सा बताया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस पर जबरदस्त घमासान रहा।
3. ममता बनर्जी का सीधा हमला
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे “बीजेपी की साजिश” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके समर्थकों और एक खास वर्ग के वोट काटने के लिए चुनाव आयोग का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे पारदर्शी प्रक्रिया बताया।
4. एग्जिट पोल की पहेली
बंगाल में एग्जिट पोल का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है। 2021 में भी कांटे की टक्कर दिखाई गई थी, लेकिन टीएमसी ने 215 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। इस बार भी एग्जिट पोल एकमत नहीं हैं, जिससे सस्पेंस और गहरा गया है।
5. खंडित अनुमान: कौन मारेगा बाजी?
2026 के ताजा एग्जिट पोल दो धड़ों में बंटे हैं। Chanakya Strategies और Matrize जैसे पोल भाजपा को बहुमत (150-160 सीटें) के करीब दिखा रहे हैं, वहीं Peoples Pulse जैसे सर्वे तृणमूल कांग्रेस की फिर से वापसी (177-187 सीटें) का दावा कर रहे हैं।
6. उत्तर बंगाल: भाजपा का अभेद्य किला?
जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जैसे जिलों में भाजपा का दबदबा बरकरार दिख रहा है। 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों की तरह ही इस बार भी उत्तर बंगाल में भाजपा को बड़ी बढ़त की उम्मीद है।
7. दक्षिण बंगाल: सत्ता की चाबी
कोलकाता और आसपास के जिलों में टीएमसी का ‘गढ़’ आज भी मजबूत माना जा रहा है। लेकिन इस बार भाजपा ने उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय और ग्रामीण इलाकों में जबरदस्त सेंधमारी की कोशिश की है। अगर यहाँ टीएमसी का किला ढहता है, तो भाजपा की राह आसान हो जाएगी।
8. भवानीपुर: ममता बनाम सुवेंदु – पार्ट 2
सबसे हॉट सीट भवानीपुर है, जहाँ ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी एक बार फिर आमने-सामने हैं। नंदीग्राम की हार के बाद ममता के लिए यह साख की लड़ाई है, जबकि सुवेंदु उन्हें फिर से हराकर ‘जायंट किलर’ का तमगा बरकरार रखना चाहते हैं।
9. दागी उम्मीदवारों की चुनौती
एडीआर (ADR) की रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। इस बार 23% उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं। गंभीर अपराधों (हत्या, महिलाओं के खिलाफ हिंसा) के आरोपी उम्मीदवारों की मौजूदगी ने बंगाल की चुनावी शुचिता पर फिर से सवाल खड़े किए हैं।
10. सत्ता परिवर्तन या निरंतरता?
क्या यह चुनाव बंगाल में तीन दशक पुराने वामपंथी शासन के अंत जैसा कोई बड़ा बदलाव लाएगा? भाजपा इसे ‘सत्ता परिवर्तन’ का साल बता रही है, जबकि ममता बनर्जी ने इसे ‘बंगाली अस्मिता’ और बाहरी बनाम भीतरी की लड़ाई बना दिया है।
आज सुबह 8 बजे से शुरू होगी मतगणना
294 सीटों के रुझान सुबह 10 बजे तक साफ होने लगेंगे। क्या ‘दीदी’ अपना किला बचा पाएंगी या भाजपा का ‘मिशन बंगाल’ पूरा होगा? फैसला बस कुछ घंटों की दूरी पर है।