Nari Shakti : महिलाएं और बंगाल का जनादेश: क्या चुनावी जीत की असली चाबी महिला मतदाता हैं?

Bindash Bol

मानव बोस

Nari Shakti : पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले एक दशक में सबसे बड़ा बदलाव अगर किसी ने किया है तो वह है महिला मतदाताओं का निर्णायक उभार। आज बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा सवाल यह नहीं रह गया कि कौन सा दल मजबूत है, बल्कि यह बन गया है—महिलाओं का झुकाव किस ओर है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में अब चुनावी जीत का गणित सीटों से पहले महिला वोट बैंक से तय होता है।

बंगाल में महिलाएं अब केवल एक वोट बैंक नहीं, बल्कि वह ‘साइलेंट डिसाइडर’ हैं जो किसी भी राजनीतिक तूफान का रुख मोड़ने की क्षमता रखती हैं।

1. आंकड़ों की जुबानी: पुरुषों से आगे निकलती महिलाएं

​हालिया रुझान बताते हैं कि बंगाल में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गई है।

* रिकॉर्ड मतदान: 2026 के विधानसभा चुनाव के शुरुआती चरणों में महिला मतदान का प्रतिशत 93.24% तक देखा गया है, जो पुरुषों (91.74%) से अधिक है।

* बढ़ती संख्या: 2011 से अब तक हर चुनाव (विधानसभा और लोकसभा) में महिलाओं का वोट प्रतिशत लगातार बढ़ा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी महिलाओं का टर्नआउट (80.16%) पुरुषों (78.2%) से ज्यादा था।

* महिला बहुल सीटें: राज्य की 294 सीटों में से कई दर्जन ऐसी सीटें हैं जहाँ महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है (जैसे जादवपुर, बेहाला, टॉलीगंज)।

2. ‘कल्याणकारी योजनाओं’ का जादू: क्यों आकर्षित होती हैं महिलाएं?

​बंगाल की महिलाओं का झुकाव अक्सर उस पक्ष की ओर होता है जो उनके हाथ में ‘आर्थिक सुरक्षा’ और ‘सम्मान’ देता है।
​प्रमुख योजनाएं और उनका असर….

* लक्ष्मी भंडार (Lakshmir Bhandar): यह वर्तमान सत्ता की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। इसमें महिलाओं को ₹1,500 से ₹1,700 प्रति माह सीधे बैंक खाते में मिलते हैं। लगभग 2.42 करोड़ महिलाएं इसकी लाभार्थी हैं।

* कन्याश्री (Kanyashree): लड़कियों की शिक्षा और बाल विवाह रोकने के लिए दी जाने वाली आर्थिक मदद ने युवा महिला वोटर्स का एक वफादार आधार तैयार किया है।

* स्वास्थ्य साथी (Swasthya Sathi): इस बीमा कार्ड का ‘मुखिया’ परिवार की महिला को बनाया गया है, जिससे उन्हें परिवार के भीतर एक नया ‘सामाजिक सम्मान’ मिला है।

3. महिला भागीदारी: विचारधारा बनाम सुरक्षा

​बंगाल में महिलाएं केवल योजनाओं के कारण वोट नहीं देतीं, बल्कि उनकी वोटिंग साइकोलॉजी के पीछे दो और बड़े कारण हैं..

* नेतृत्व का चेहरा: ममता बनर्जी के रूप में एक महिला मुख्यमंत्री का होना महिलाओं के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा करता है। विपक्ष ने भी इस बार महिला सुरक्षा (जैसे आर.जी. कर घटना और संदेशखाली मुद्दे) को बड़ा मुद्दा बनाकर इस वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है।

* सुरक्षा और शांति: बंगाल की ग्रामीण महिलाएं अक्सर उस पार्टी को चुनती हैं जो उन्हें स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और शांति का माहौल दे सके।

क्या होगा परिणाम?

​जिस पार्टी ने महिलाओं के “रसोई के बजट” और “व्यक्तिगत सम्मान” को सुरक्षित रखने का भरोसा दिया होगा, आज ‘बल्ले-बल्ले’ उसी की होगी। विपक्ष ने ‘मातृशक्ति भरोसा कार्ड’ जैसे वादों से टक्कर देने की कोशिश की है, लेकिन क्या वे ‘लक्ष्मी भंडार’ के स्थापित प्रभाव को काट पाएंगे? यह आज के नतीजे बताएंगे।

TAGGED:
Share This Article
Leave a Comment