Chandra Nath Rath :  जेल नेटवर्क, कोयला–कैटल रैकेट और बंगाल की सियासत!

Bindash Bol

मनोज कुमार मिश्रा

Chandra Nath Rath : चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद सबसे ज़्यादा गूंजा सवाल यही था—“ आखिर क्यों?” क्यों एक PA पर 30–40 लाख की सुपारी लगाई जाएगी? सिर्फ़ इसलिए कि वह बंगाल में ममता बनर्जी के सबसे बड़े दुश्मन शुभेंदु अधिकारी का करीबी था, या उसके पास ऐसी सूचनाएँ थीं जिनसे बहुत कुछ खुल सकता था?

चंद्रनाथ रथ सिर्फ़ एक PS/PA नहीं थे; भवानीपुर जैसे हाई‑स्टेक्स चुनाव के दौरान वे सुवेंदु अधिकारी के लिए “आंख‑कान” की तरह काम कर रहे थे—कौन बूथ कितना झुका, कौन अफसर किसके दबाव में है, TMC कैम्प में क्या हलचल है, ये सब जानकारी उन्हीं के ज़रिए सुवेंदु तक लगातार पहुँचती थी।

यही वजह थी कि BJP ने खुलकर आरोप लगाया कि यह हत्या ममता बनर्जी की हार का “बदला” है और चुनाव बाद की राजनीतिक हिंसा की सबसे बड़ी घटना है।

TMC इन आरोपों से इंकार करते हुए खुद अदालत की निगरानी में CBI जांच की मांग करती रही, ताकि ममता या अभिषेक बनर्जी पर सीधे उंगली न उठ सके।
लेकिन राजनीतिक बदले के साथ‑साथ एक और गहरी पृष्ठभूमि है, जो इस केस को और पेचीदा बना रही थी —कोयला तस्करी और मवेशी तस्करी के बड़े रैकेट।

पिछले कुछ सालों से CBI और ED, बंगाल–झारखंड बेल्ट में कोयला तस्करी और भारत‑बांग्लादेश बॉर्डर पर मवेशी तस्करी मामलों की जांच कर रहे हैं, जिनमें कई TMC नेताओं, कारोबारियों और अफसरों पर सवाल उठ चुके हैं।

कोयला घोटाले के मनी‑लॉन्ड्रिंग हिस्से में TMC सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ( जानकारों का कहना है कि लोकलाज की वजहों से वो बनर्जी हैं, वर्ना हैं मुखर्जी)  तथा उनके परिवार से ED कई बार पूछताछ कर चुकी है; एजेंसियों का आरोप है कि अवैध कोयला खनन से निकला “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” उनके सर्कल तक पहुँचा, जबकि अभिषेक इसे खुलकर राजनीतिक प्रतिशोध बताते हैं।

इसी तरह मवेशी तस्करी केस में उनके करीबी माने जाने वाले विनय मिश्रा सहित कई नामों पर CBI–ED ने रेड्स और कार्रवाई की है; BJP का नैरेटिव रहा है कि गाय और कोयला दोनों के पैसे TMC की टॉप लेयर तक पहुँचते रहे हैं, जबकि TMC इसे “केंद्र सरकार की एजेंसियों का दुरुपयोग” कहती रही।

यहीं पर चंद्रनाथ की भूमिका और ज़्यादा संवेदनशील हो जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक हलकों में यह संभावना जोर पकड़ती है कि सुवेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी होने के नाते चंद्रनाथ उन फाइलों, इनपुट्स और “डेली इंटेल” तक पहुंच रखते होंगे जो इन रैकेट्स और सत्ता‑नेटवर्क के रिश्तों पर रोशनी डाल सकते थे—चाहे वह कोयला बेल्ट का इनसाइड डेटा हो या बॉर्डर रूट्स का इनपुट।

इसी वजह से जांच एजेंसियाँ यह एंगल भी परख रही हैं कि क्या यह हमला सिर्फ चुनावी दुश्मनी तक सीमित नहीं, बल्कि उन नेटवर्क्स को बचाने की बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता था जो CBI–ED की जांच से घबराए हुए हैं।

लेकिन यहाँ एक ज़रूरी लाइन खींचना जरूरी है—अब तक न SIT, न CBI, न ED और न ही किसी आधिकारिक दस्तावेज़ ने सीधे यह कहा है कि चंद्रनाथ की हत्या की सुपारी TMC के किसी नेता या शीर्ष नेतृत्व ने दी।
यह एंगल फिलहाल “संभावित मोटिव” के रूप में जांच का हिस्सा है, साबित जुर्म के रूप में नहीं। दूसरी तरफ, वही जांच यह भी दिखा रही थी कि इस हत्या के पीछे जो 40 लाख का कॉन्ट्रैक्ट नेटवर्क काम कर रहा था, उसकी कड़ियाँ बंगाल की जेल के अंदर बैठे अपराधियों से लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश और शायद बॉर्डर तक फैली हो सकती हैं।

जेल से फोन और मुलाक़ातों के ज़रिए बाहर के कॉन्ट्रैक्ट किलर्स को एक्टिवेट करना, OLX पर कार की डील, WhatsApp ग्रुप पर रेकी और अटैक की प्लानिंग, बाली टोल पर UPI पेमेंट, चोरी की गाड़ियाँ, Glock जैसी विदेशी पिस्टल—ये सब मिलकर यह बता रहे थे कि यह कोई “लोकल झगड़ा” नहीं, बल्कि एक संगठित सुपारी मशीनरी की कारवाई थी।

कल की तारीख में तस्वीर यह थी कि… हत्या का पूरा सीक्वेंस, गाड़ियों की क्रोनोलॉजी, बाली टोल पर UPI क्लू, Glock पिस्टल और 30–40 लाख की सुपारी—ये सभी बड़े टुकड़े काफी हद तक साफ हो चुके थे।

आज मुख्य हत्यारे सहित चार शार्पशूटर्स— जो यूपी और बिहार के बक्सर बेल्ट से पकड़े गए,को SIT ने कोलकाता में शुरू कर दी है और बारासात कोर्ट ने 13 दिन की कस्टडी दे दी है; पुलिस इन्हें ही अब की कड़ियाँ जोड़ रही है।

लेकिन रुकिए—अभी असली खेल बाकी है!

UPI का वो एक बीप जिसने शूटरों को फँसाया, वो पैसा किस के खाते से आया। पुलिस की नजरों में आया वो पार्षद कौन? क्या किसी राजनेता का लॉयलिस्ट ? और कौन है वो जेल का वो 20+ हत्याओं  का बादशाह! जिसने जेल में स्मगल्ड फोन से WhatsApp से कॉल किया—  जानेंगे अगले भाग में!
       

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