Madhyamgram Murder :  “एम्बुश नाइट” – चंद्रनाथ रथ की आख़िरी शाम!

Bindash Bol

मनोज कुमार मिश्रा

Madhyamgram Murder : 6 मई 2026 की रात, लगभग साढ़े 10 बजे। कोलकाता एयरपोर्ट से करीब 7 किलोमीटर दूर उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम की दोहरिया लेन हल्की बारिश और कीचड़ में भीगी हुई थी।

सफेद महिंद्रा स्कॉर्पियो में बैठकर 41 साल के चंद्रनाथ राठ घर लौट रहे थे—वही चंद्रनाथ, जो कुछ ही दिन पहले तक भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ़ हुई ऐतिहासिक जीत के दौरान सुवेंदु अधिकारी के “आंख‑कान” बने हुए थे।

स्कॉर्पियो जैसे ही दोहरिया लेन के उस हिस्से में पहुंची जहाँ सड़क संकरी और पानी से भरी थी, पीछे से आ रही सिल्वर निसान माइक्रा अचानक स्पीड पकड़ कर गाड़ी को ओवरटेक करती है।

चंद सेकंड में माइक्रा सामने कट मारकर तेज़ ब्रेक लगाती है और चंद्रनाथ की गाड़ी को मजबूरन रोक देती है। ड्राइवर के पास संभलने का मौका ही नहीं था—यह कोई सामान्य ओवरटेक नहीं, एक प्री‑प्लान्ड एम्बुश था।

जैसे ही स्कॉर्पियो रुकती है, दो मोटरसाइकिलें दोनों तरफ से आकर बिल्कुल नज़दीक साइड में लगती हैं। हेलमेट पहने शूटर बाइक से उतरते हैं, खिड़की के बिल्कुल पास आकर पॉइंट‑ब्लैंक रेंज से फायरिंग शुरू कर देते हैं—6, 8 या 10 राउंड, चश्मदीद आंकड़ा बदलते हैं लेकिन तस्वीर एक ही है: कुछ ही सेकंड में गोलियों की बरसात।

Austrian‑made Glock 47X पिस्टल से निकली 4 गोलियां चंद्रनाथ के सिर, सीने और पेट को चीर देती हैं; ड्राइवर भी घायल हो जाता है। पूरा ऑपरेशन 40–50 सेकंड से ज़्यादा नहीं चलता—एक क्लासिक, प्रोफेशनल “कॉन्ट्रैक्ट हिट”।

इसके बाद जिस तेजी से यह मौत का स्क्वॉड आया था, उसी तेजी से गायब भी हो जाता है। निसान माइक्रा को थोड़ी दूरी पर छोड़कर हमलावर एक लाल कार और दो बाइक पर सवार होकर इलाके से निकल जाते हैं।

कुछ ही मिनट में मौके पर चीख‑पुकार, लोग, पुलिस और एंबुलेंस की चमचमाती लाइटें—चंद्रनाथ को अस्पताल ले जाया जाता है, लेकिन डॉक्टर उन्हें “ब्रॉट डेड” घोषित कर देते हैं।

जांचकर्ताओं को इस बात पर भी शक हुआ कि चंद्रनाथ की दिनचर्या और कार में बैठने की सटीक पोज़िशन—हमेशा फ्रंट पैसेंजर सीट पर—जैसी जानकारी किसी अंदरूनी स्रोत से लीक हुई हो सकती है, क्योंकि शूटरों ने ठीक उसी साइड पर खड़े होकर पॉइंट‑ब्लैंक रेंज से टारगेट किया, जहाँ वे बैठे थे।

यह सब संयोग से ज़्यादा एक इनसाइड इनपुट जैसा दिखा, जिसका थ्रेड SIT अब खींचने की कोशिश करने में जुट गयी। कौन थे ये लोग? इतना प्रिसाइज़ एम्बुश किसने प्लान किया? और सबसे बड़ा सवाल—चंद्रनाथ ही क्यों?

राज्य की सियासत पहले से ही आग पर थी। BJP इसे चुनाव बाद की सबसे बड़ी राजनीतिक हत्या बता रही थी, तो TMC उल्टा CBI जांच की मांग कर रही थी ताकि गेंद केंद्र के पाले में फेंकी जा सके। पर उस रात, मध्यमग्राम की गीली सड़क पर सिर्फ़ एक सच था—सुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी को बीच सड़क पर गोलियों से भून दिया गया था।

लेकिन असली कहानी तो उसके बाद शुरू हुई—जब पुलिस को एक टोल प्लाज़ा पर हुई एक छोटी‑सी UPI पेमेंट में “डेथ स्क्वॉड” का डिजिटल फुटप्रिंट मिला… जानेंगे आगे Part-2 में।
     

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