India US Deal : क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियां एक ऐसे गुप्त समझौते की ओर बढ़ रही हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था का रुख पूरी तरह बदल देगा? व्हाइट हाउस से लेकर दिल्ली के गलियारों तक इस वक्त सिर्फ एक ही चर्चा है-भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ऐतिहासिक द्विपक्षीय व्यापार संधि (BTA)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने खुद मीडिया के सामने आकर कुछ ऐसा कहा है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। ट्रम्प ने सीधे शब्दों में स्वीकार किया, “हम बहुत पैसा कमा रहे हैं…”। लेकिन इस अरबों डॉलर की डील के पीछे का असली सस्पेंस क्या है?
‘वह मेरे अच्छे दोस्त हैं…’: ट्रम्प का अचानक बदला रुख और मोदी कनेक्शन!
व्हाइट हाउस के प्रेस रूम में जब पत्रकारों ने भारत-US संबंधों पर सवाल दागा, तो ट्रम्प का अंदाज देखने लायक था। सालों तक भारत की टैरिफ नीतियों की आलोचना करने वाले ट्रम्प ने इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘अच्छा दोस्त’ बताते हुए तारीफों के पुल बांध दिए।
ट्रम्प ने अतीत के पन्नों को पलटते हुए कहा, “सालों तक भारत ने अमेरिका का फ़ायदा उठाया… उन्होंने हम पर भारी टैरिफ़ लगाए और कुछ भी भुगतान नहीं किया।” लेकिन ठीक इसी बयान के बाद कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट आया। ट्रम्प ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब स्थिति बिल्कुल उलट है और हम भारत के साथ बहुत पैसा कमा रहे हैं। लेकिन हम एक समझौते पर जरूर पहुंचेंगे क्योंकि मुझे आपके प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) बहुत पसंद हैं, वह मेरे एक अच्छे दोस्त हैं, और हमारी आपस में बेहतरीन पटरी बैठती है।” राष्ट्रपति के इस बयान ने साफ कर दिया है कि दोनों देशों के बीच परदे के पीछे कोई बहुत बड़ा खेल चल रहा है।
सिर्फ 1% का सस्पेंस: आखिर कहां फंसा है पेंच?
यह डील कितनी करीब है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और भारत के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल दोनों ने एक ही रहस्यमयी आंकड़े का जिक्र किया है-99 प्रतिशत! मुंबई में आयोजित ‘CITI 2026 इंडिया कॉन्फ्रेंस’ के दौरान राजदूत गोर ने मीडिया को बताया कि इस महा-डील की बातचीत 99% पूरी हो चुकी है। अब सारा सस्पेंस उस आखिरी ‘एक प्रतिशत’ पर आकर टिक गया है। रक्षा और व्यापार विशेषज्ञों के मन में सवाल है कि आखिर उस आखिरी 1 फीसदी के बंद कमरे में क्या चल रहा है?
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस सस्पेंस से थोड़ा पर्दा उठाते हुए कहा, “सभी मुख्य मुद्दों पर सहमति बन गई है। मुझे पूरा भरोसा है कि हम अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण जल्द से जल्द पूरा कर लेंगे।” सूत्रों के मुताबिक, यह आखिरी बाधा कोई बहुत बड़ा विवाद नहीं, बल्कि कुछ छोटी-मोटी कानूनी बारीकियों और मौजूदा 10% शुल्क की समय सीमा खत्म होने के बाद लागू होने वाले नए अमेरिकी टैरिफ ढांचे को लेकर है। भारत हर हाल में यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले ज्यादा फायदा मिले।
क्या है वॉशिंगटन का ‘गेम प्लान’ और वो 54 देशों की मिस्ट्री लिस्ट?
इस पूरी व्यापार वार्ता के बीच अमेरिका ने एक ऐसा कदम भी उठाया है जिसने दुनिया भर के कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के ऑफिस ने अचानक भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, जापान, यूके और रूस समेत 54 देशों की एक सूची जारी कर दी है।
अमेरिका का दावा है कि ये देश जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने सामानों के आयात पर रोक लगाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। एक तरफ जहां ट्रम्प पीएम मोदी को अपना परम मित्र बताकर जल्द से जल्द व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की समय सीमा (आने वाले कुछ हफ्ते या महीने) तय कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ USTR की इस लिस्ट ने भविष्य की रणनीतियों को लेकर एक नया सस्पेंस पैदा कर दिया है। क्या यह अमेरिका की कोई दबाव बनाने की नीति है, या फिर इस व्यापार समझौते के जरिए दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर निर्माण और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन को पछाड़ने के लिए कोई नया चक्रव्यूह रच रहे हैं? जवाब जल्द ही दुनिया के सामने होगा।
किन क्षेत्रों में खुल सकते हैं नए अवसर?
प्रस्तावित समझौता केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है। दोनों देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर निर्माण, उन्नत प्रौद्योगिकी, नवाचार और रणनीतिक उद्योगों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दे रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर मिल सकते हैं, जबकि अमेरिकी निवेशकों के लिए भारत एक और आकर्षक गंतव्य बन सकता है।
क्या जल्द हो सकता है ऐतिहासिक ऐलान?
दोनों देशों के अधिकारियों के हालिया बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि समझौते का पहला चरण आने वाले हफ्तों या महीनों में पूरा हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी। अब सबकी निगाहें उस “आखिरी 1 प्रतिशत” पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि बहुप्रतीक्षित भारत-US व्यापार समझौता कब औपचारिक रूप से हकीकत बनता है और दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को कितनी नई ऊंचाई मिलती है।