Mamata Banerjee : TMC में महाटूट! ममता का किला ढहने की कगार पर, 20 सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंका

Siddarth Saurabh

Mamata Banerjee : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अब अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पहले विधायक दल में सेंध लगी और अब ममता बनर्जी की संसदीय पार्टी भी टूट के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग गुट बनाने की तैयारी कर ली है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को हस्ताक्षरित पत्र भी सौंप दिया गया है।
दिल्ली में सोमवार को हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया। एक तरफ ममता बनर्जी INDIA गठबंधन की बैठक में विपक्षी एकता का संदेश दे रही थीं, वहीं दूसरी तरफ उनके अपने सांसद पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल रहे थे।

दिल्ली में हुई हाई-वोल्टेज बैठक


केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर हुई अहम बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और टीएमसी के बागी सांसदों का बड़ा समूह मौजूद रहा। बताया जा रहा है कि यहीं पर भविष्य की रणनीति और भाजपा में संभावित शामिल होने की शर्तों पर अंतिम चर्चा हुई।

बिना गारंटी नहीं छोड़ेंगे ममता का साथ

सूत्रों के अनुसार बागी सांसदों ने भाजपा नेतृत्व के सामने तीन बड़ी शर्तें रखी हैं।

1. 2029 का टिकट पक्का चाहिए


सांसद चाहते हैं कि उन्हें अभी से 2029 लोकसभा चुनाव के लिए टिकट की गारंटी मिले ताकि टीएमसी छोड़ने के बाद उनका राजनीतिक भविष्य सुरक्षित रहे।

2. केंद्रीय सुरक्षा का भरोसा


कई सांसदों को आशंका है कि टीएमसी से अलग होने के बाद पश्चिम बंगाल में उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा व्यवस्था की मांग रखी है।

3. सत्ता में सम्मानजनक हिस्सेदारी


बागियों में कुछ प्रभावशाली नेता केवल टिकट से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी नजर केंद्र सरकार के आयोगों, बोर्डों और सरकारी निगमों में चेयरमैन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर है।

कौन-कौन सांसद बगावत के मंच पर पहुंचे?

बैठक में शामिल बताए जा रहे सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, शताब्दी रॉय, असित माल, बप्पी हलधर, जून मालिया, जगदीश बसुनिया, कालीपद सोरेन, अरूप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक और शर्मिला सरकार प्रमुख हैं।

ये नेता भी कतार में!

सूत्रों का दावा है कि रचना बनर्जी, यूसुफ पठान, देब अधिकारी और शत्रुघ्न सिन्हा भी दिल्ली नेतृत्व के संपर्क में हैं और शर्तों पर सहमति बनने के बाद खुलकर सामने आ सकते हैं।

ममता के लिए सबसे बड़ा खतरा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बागी सांसदों का यह समूह भाजपा के साथ चला जाता है तो यह बंगाल के हालिया इतिहास का सबसे बड़ा समन्वित दल-बदल साबित हो सकता है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहले से दबाव झेल रही ममता बनर्जी के लिए यह झटका पार्टी के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े कर सकता है।
बंगाल की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ममता बनर्जी इस बगावत को रोक पाएंगी या फिर टीएमसी का किला भीतर से ही ढह जाएगा?

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