Ration Card : देश के करोड़ों गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार अंत्योदय अन्न योजना (AAY) में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। यदि प्रस्तावित संशोधन लागू हो जाता है, तो अब मुफ्त अनाज का वितरण केवल परिवार के आधार पर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों की संख्या के अनुसार किया जाएगा। इससे बड़े परिवारों को पहले की तुलना में अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
क्या है मौजूदा व्यवस्था?
वर्तमान में अंत्योदय अन्न योजना के तहत पात्र परिवारों को हर महीने 35 किलो खाद्यान्न दिया जाता है। परिवार में दो सदस्य हों या दस, अनाज की मात्रा समान रहती है। वहीं प्राथमिकता श्रेणी (Priority Households) के लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज मिलता है। इस व्यवस्था के कारण बड़े परिवारों को प्रति सदस्य अपेक्षाकृत कम खाद्यान्न मिल पाता है।
नए फॉर्मूले में क्या होगा?
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा तैयार किए गए ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026’ में प्रस्ताव है कि अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति हर महीने 7 किलो अनाज दिया जाए। हालांकि प्रति परिवार अधिकतम सीमा 35 किलो ही रहेगी।
उदाहरण के लिए…
- 2 सदस्यों वाले परिवार को 14 किलो अनाज मिलेगा।
- 3 सदस्यों वाले परिवार को 21 किलो अनाज मिलेगा।
- 4 सदस्यों वाले परिवार को 28 किलो अनाज मिलेगा।
- 5 या उससे अधिक सदस्यों वाले परिवारों को 35 किलो तक का लाभ मिलता रहेगा।
बड़े परिवारों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में बड़े परिवारों की वास्तविक जरूरतों का पूरा ध्यान नहीं रखा जा पाता। नया मॉडल लागू होने पर खाद्यान्न का वितरण अधिक न्यायसंगत और जरूरत आधारित होगा, जिससे गरीब परिवारों की खाद्य सुरक्षा और मजबूत होगी।
13 जुलाई तक मांगे गए सुझाव
सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 में संशोधन के इस प्रस्ताव पर आम जनता से 13 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। सुझावों के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य क्या है?
केंद्र सरकार का कहना है कि यह बदलाव ‘मानव जीवन चक्र दृष्टिकोण’ के तहत खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गरीब और कमजोर वर्गों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सके।
यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो देश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है, जिससे करोड़ों लाभार्थियों को सीधे तौर पर फायदा मिलेगा।
