Hemant Soren : मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं लिख पाया प्रशासन! बोकारो डीसी के जवाब ने बढ़ाया विवाद

Bindash Bol

Hemant Soren : सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ही बदल गए! बोकारो जिला प्रशासन की लापरवाही का ऐसा नमूना सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नशा मुक्ति अभियान जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए लगाए गए सरकारी फ्लेक्स में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का नाम ही गलत छाप दिया गया। पोस्टर में “हेमंत” की जगह “हेमंन सोरेन” लिखा गया, जबकि अभियान से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थान रिनपास को भी “रिवा श्वास” बना दिया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी फ्लेक्स छापने से पहले उसकी जांच किसने की? क्या जिला प्रशासन के किसी अधिकारी ने पोस्टर को देखने की जरूरत तक नहीं समझी? जब मुख्यमंत्री के नाम की स्पेलिंग तक सही नहीं लिखी जा सकती, तो फिर सरकारी कामकाज की गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मामला तब और विवादित हो गया जब बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा से इस गलती पर सवाल पूछा गया। गलती स्वीकार करने या जिम्मेदारी तय करने के बजाय उन्होंने कहा कि भाषाई और व्याकरण संबंधी त्रुटियां भी अध्ययन का हिस्सा हैं और लोगों को कार्यक्रम के उद्देश्य पर ध्यान देना चाहिए।
अब सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी लापरवाही को भी “भाषाई त्रुटि” कहकर टाला जा सकता है? क्या करोड़ों रुपये के सरकारी प्रचार-प्रसार में जवाबदेही नाम की कोई चीज नहीं बची है? लोगों का कहना है कि जिन मामलों में प्रशासन को जवाब देना चाहिए, वहां सफाई देने के बजाय बहाने बनाए जा रहे हैं।

नशा मुक्ति अभियान निस्संदेह समाज के लिए जरूरी है, लेकिन क्या ऐसे अभियानों की गंभीरता को प्रशासन खुद ही हल्के में नहीं ले रहा? मुख्यमंत्री का नाम गलत, संस्थान का नाम गलत और फिर उस पर बेतुकी सफाई—आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

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