Alka Yagnik : एक आवाज़, जिसने करोड़ों दिलों को छुआ… लेकिन आज खुद सन्नाटे से लड़ रही है।
Alka Yagnik : 23 जून का दिन भारतीय संगीत जगत के लिए गर्व का था। देश की महान पार्श्व गायिका अलका याज्ञनिक को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन में जब उनका नाम पुकारा गया, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हर चेहरा सम्मान और गर्व से भरा था।
लेकिन इस पूरे दृश्य की सबसे मार्मिक सच्चाई यह थी कि जिन तालियों की गूंज पूरे हॉल में सुनाई दे रही थी, उन्हें सम्मानित होने वाली अलका याज्ञनिक सुन ही नहीं पा रही थीं।
व्हीलचेयर पर बैठकर मंच तक पहुंचीं अलका की मुस्कान में गर्व भी था और दर्द भी। वह दर्द, जिससे वे पिछले दो वर्षों से चुपचाप लड़ रही हैं।
अलका याज्ञनिक सेंसरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं। इस बीमारी में कान की अंदरूनी नसें प्रभावित हो जाती हैं और सुनने की शक्ति लगभग समाप्त हो सकती है। इलाज में स्टेरॉयड इंजेक्शन, ऑक्सीजन थेरेपी और कई चिकित्सकीय प्रयास किए जाते हैं, लेकिन कई मामलों में सुनने की क्षमता पूरी तरह लौट नहीं पाती।
यह बीमारी तेज़ आवाज़, वायरल संक्रमण, ऑटोइम्यून बीमारी, चोट या रक्त प्रवाह और नसों से जुड़ी समस्याओं के कारण भी हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार यदि अचानक सुनाई देना बंद हो जाए या कान में लगातार घंटी (टिनिटस) सुनाई दे, तो 24 घंटे के भीतर ईएनटी विशेषज्ञ से इलाज शुरू होने पर सुनने की शक्ति बचने की संभावना बढ़ जाती है।
पुरस्कार मिलने के बाद अलका ने सोशल मीडिया पर जो लिखा, उसने लाखों लोगों की आंखें नम कर दीं।
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से वे लाइमलाइट और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहीं। यह सफर आसान नहीं था, लेकिन लोगों की दुआओं, प्यार और साथ ने उन्हें हर मुश्किल में हिम्मत दी। उन्होंने लिखा कि यह सम्मान सिर्फ उनके काम की पहचान नहीं, बल्कि उम्मीद, साहस और लोगों के अटूट स्नेह का प्रतीक है।
यही अलका याज्ञनिक हैं, जिनकी आवाज़ पर कभी पूरा देश झूम उठा था। “एक दो तीन…” से लेकर “घूंघट की आड़ से…” तक न जाने कितने गीत आज भी लोगों की यादों में बसे हैं। उनकी मधुर आवाज़ ने प्रेम, विरह, खुशी और उत्सव—हर भावना को सुर दिए।
आज विडंबना यह है कि जिनकी आवाज़ करोड़ों लोगों की धड़कन बन गई, वही स्वर साम्राज्ञी अब दुनिया की आवाज़ें सुनने के लिए संघर्ष कर रही हैं।बिंदास बोल परिवार सहित हम सभी की यही प्रार्थना है कि ईश्वर उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य लाभ दें। क्योंकि कुछ आवाज़ें केवल गाने नहीं गातीं, वे पीढ़ियों की यादें बन जाती हैं… और अलका याज्ञनिक की आवाज़ उन्हीं अमर आवाज़ों में से एक है।