Bhu Mafia : भूमाफियाओं का राज

Nishikant Thakur

Bhu Mafia : आजादी के समय देश की आबादी करीब 34 करोड़ के आसपास थी, लेकिन वर्ष 1951–52 में देश की जनगणना कराई गई तो आबादी बढ़कर 36.10 करोड़ हो गई थी । अल्प संसाधनों के बावजूद अन्न की कमी नहीं थी। देश में खुशहाली थी । धीरे धीरे जनसंख्या  बढ़ती गई और आज डेढ़ सौ करोड़ के करीब पार करने के समीप पहुंच गई है। स्वाभाविक है कई तरह के नफा — नुकसान देश को होने लगे । जमीन का घनत्व तो बढ़ा नहीं, लेकिन बेतरतीब जनसंख्या बढ़ोत्तरी ने लाभ  कम कर दिए। इस बीच भूमाफियाओं का एक नया गैंग तैयार हो गया है। वैसे भारत में आधिकारिक तौर पर भू-माफिया की सक्रियता को मापने के लिए कोई केंद्रीय रैंकिंग मौजूद नहीं  है, लेकिन राज्य सरकारों द्वारा भू-माफियाओं को चिह्नित करने और उनके खिलाफ दर्ज मामलों के आधार पर, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में भू-माफिया सबसे अधिक सक्रिय और चर्चित है ।
 
सबसे पहले आज उस मुद्दे की चर्चा करते हैं कि जिसने देश को गरमा दिया है। वह है राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा किए गए जमीन घोटाले का मुद्दा । आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर कथित जमीन घोटाले और दान की रकम में गड़बड़ी को लेकर विशेष जांच दल को कई दस्तावेज सौंपे है ।  जिनमें उनके द्वारा दिए गए मुख्य सबूत और आरोप के दस्तावेज शामिल हैं।
दान में मिले पैसों से जमीनें खरीदने के लिए उनकी वास्तविक बाजार कीमत से कई गुना ज्यादा दाम दिए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, लगभग दो करोड़ की जमीन कुछ ही मिनटों में ट्रस्ट को लगभग 18.5 करोड़ में बेचे जाने और एक मामले में नौ करोड़ की जमीन 55.47 करोड़ में खरीदे जाने का आरोप है। संजय सिंह ने ऐसे दस्तावेज सौंपे हैं जिनमें आरोप लगाया गया है कि नजूल भूमि (जिसे कानूनी तौर पर खरीदा या बेचा नहीं जा सकता) का सौदा ट्रस्ट के पैसों से किया गया। कुछ जमीन सौदों में तत्कालीन अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्टी अनिल कुमार मिश्रा के नाम सामने आए हैं ,जहाँ एक ही गवाह दोनों पक्षों (खरीदने और ट्रस्ट को बेचने) की रजिस्ट्री में शामिल था। जमीनों की खरीद-फरोख्त के अलावा, उन्होंने मंदिर में आने वाले दान-चढ़ावे, सोने-चांदी और आभूषणों के गायब होने/हेराफेरी के भी सबूत भी देने का दावा किया है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देश में हंगामा होने लगा है और विपक्षियों द्वारा कहा जाने लगा है कि जब  राम मंदिर में जमीन का घोटाला हो सकता है, तो फिर कहां जमीनों का घोटाला नहीं हो सकता। एसआईटी को सौंपे कागजातों को वे जमीन घोटाले का पुख्ता सबूत कहते हैं ।
 
एक दूसरा मामला ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘द हिंदू’की रिपोर्ट्स में उजागर हुआ है, वह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े उज्जैन भूमि मामले पर केंद्रित हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े भूमि विवाद को लेकर इन अखबारों में निम्नलिखित मुख्य जो बातें कही गई वह यह कि दिसंबर 2023 में सीएम बनने के बाद से मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन में लगभग 168 एकड़ जमीन के कम से कम 137 भूखंड खरीदे हैं। ।  इसमें से लगभग 111 एकड़ जमीन उन प्रमुख क्षेत्रों में खरीदी गई है, जहां राज्य सरकार द्वारा नई सड़क परियोजनाओं और विकास कार्यों की घोषणा की गई थी । ‘द हिंदू’ समाचार पत्र ने बताया है कि विपक्षी पार्टी (कांग्रेस) ने इस खुलासे को लेकर मुख्यमंत्री पर “इनसाइडर ट्रेडिंग” और “महाकाल की भूमि की लूट” के गंभीर आरोप लगाए है । कांग्रेस इन आरोपों पर मुख्यमंत्री के इस्तीफे और सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज से जांच की मांग कर रही हैं ।  वहीं दूसरी ओर, बीजेपी ने इन सभी आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया है।
 
बिहार में भूमि घोटालों, अवैध कब्जों और जमीन से जुड़े विवादों को रोकने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार ने कई सख्त कानून और नियम लागू किए थे। इनमें सबसे प्रमुख बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम कानून है। बिहार सरकार द्वारा जमीन घोटालों से निपटने के लिए उठाए गए मुख्य कदम इस प्रकार बताए जा रहे हैं । बिहार भूमि विवाद निराकरण अधिनियम  2009  इस कानून के तहत एक त्वरित तंत्र  बनाया गया है ताकि रैयतों की जमीन पर अवैध कब्जा या जमाबंदी में गड़बड़ी जैसे मामलों को सुलझाया जा सके। इसके तहत सभी लंबित मामलों का निपटारा अधिकतम तीन महीने के भीतर करने का सख्त निर्देश दिया गया है। जमीन मापने के लिए नए समय-सीमा नियम भी बनाए गए हैं । जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी या फर्जीवाड़े से बचने के लिए सरकार ने माप प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी बना दिया है। इसके तहत अविवादित जमीन की माप अधिकतम  सात  दिनों में और विवादित जमीन की माप 11 दिनों में पूरी करना अनिवार्य कहा गया है। बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम,   यह कानून जमीन की खरीद-बिक्री के बाद नामान्तरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाता है, ताकि कोई भी जालसाज गलत तरीके से जमाबंदी में हेरफेर न कर सके। भू-माफिया पर नकेल और विशेष अभियान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा भू-माफियाओं पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकारी जमीनों की सूची बनाकर निबंधन कार्यालयों  को सौंप दी गई है, ताकि बिना सरकार की अनुमति के सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री न हो सके। आपराधिक कानून (अपराध नियंत्रण विधेयक भू-माफियाओं, अवैध बालू माफियाओं के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए नीतीश सरकार ने सख्त दंडात्मक प्रावधान भी लाई थी, जिसके तहत जिलाधिकारी को असामाजिक तत्वों पर तड़ीपार (जिला बदर) करने जैसी कड़ी कार्रवाई का अधिकार दिया गया है। 
 
भू माफियाओं पर लगाम कसने के लिए निश्चित रूप से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने बड़े ही सराहनीय कानून बनाए, लेकिन भुक्तभोगियों की एक बानगी यहां बताना प्रासंगिक होगा। जैसा कि एक  भुक्तभोगी ने बताया कि अपने रोजगार के लिए वर्ष 1978 में वह बिहार से बाहर चला गया। जब कुछ वर्षों बाद वह आया तो देखा कि उसकी सारी जमीन अपनो ने ही हड़प रखी है। बात करने पर उसे बताया गया यहां इसी तरह होता है आप तो बाहर जाकर अपना जीवन यापन करते रहे , लेकिन जिन्होंने आपकी जमीन को कब्जा  किया है वे बहुत बड़े भू माफिया हैं। अब आप पुलिस के पास जाएं । लेकिन, यह क्या, पुलिस से मिलने के बाद पुलिस भी  उसी  सुर में गाने लगी। पुलिस ने उससे कहा कि आप वह जमीन छोड़ दें । यदि आप कानूनी उलझन में पड़ेंगे तो आपको उस पर कब्जा मिलने में वर्षों लग जाएंगे । सच तो यह है कि सरकार ने आम जनता के लिए कानून तो ढेरों बनाए हैं, लेकिन उस कानून को समाज उलझन मानकर उससे बचना चाहता है । अब ऐसी स्थिति में क्या किया जा सकता हैं !  सब चोरी की सजा तो निर्धारित है , लेकिन जमीन चोरी के मामले से निपटने में कई लोग अपना जीवन, अपनी ही संपति बर्बाद कर देते हैं ? इस तरह के भू माफिया सरकार से टकराने और जमीन से अपना कब्जा खोए व्यक्ति के लिए गोली – बंदूक लेकर जान  लेने के लिए तैयार घूमते रहते है और बिहार सरकार की इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह उसे कानूनी शिकंजों में जकड़ सके।बिहार को चाहिए कि वह पूर्व मुख्यमंत्री  द्वारा बनाए गए इस नियम को और कठोरता से लागू करे। अन्यथा जो बिहार से बाहर जीवन सवारने के लिए गए हुए हैं वे फिर कभी बिहार के विकास  के लिए अपना कोई योगदान दे पाने की स्थिति में नहीं रहेंगे । इस लिए बिहार सरकार के साथ- साथ केंद्र सरकार को भी भू माफियाओं के चंगुल से आम लोगों को निजात दिलाने के लिए सख्त कदम उठाने ही होंगे ।

(लेखक वरिष्ट पत्रकार और स्तंभकार हैं)

TAGGED:
Share This Article
Leave a Comment