Bengal Ashish Banerjee : बंगाल की राजनीति में उस वक्त भीषण भूचाल आ गया, जब पांच बार के विधायक और पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में टीएमसी कार्यालय के भीतर फंदे से लटकता मिला। मौके से बरामद सुसाइड नोट ने कई गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के सामने आते ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विपक्ष और टीएमसी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला और इसे केवल एक मौत नहीं, बल्कि संभावित ‘ब्लैकमेलिंग और मानसिक उत्पीड़न’ का परिणाम करार दिया।
ब्लैकमेलिंग का शिकार या बगावत की सजा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए साफ किया कि एक ईमानदार और अनुभवी नेता को इस हद तक मजबूर किसने किया? उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और ऋतब्रत बनर्जी के विद्रोही गुट का साथ देने की वजह से क्या आशीष बनर्जी को निशाना बनाया जा रहा था?
* अपनों से दूरी का सच क्या है? चुनाव के बाद उन्होंने तत्कालीन नेतृत्व और ममता बनर्जी से दूरी क्यों बनाई और बनाई गई समितियों से इस्तीफा क्यों दिया?
* कौन कर रहा था ब्लैकमेल? क्या टीएमसी के भ्रष्ट तंत्र ने उन पर मुंह बंद रखने का दबाव बनाया था या उन्हें किसी गंभीर परिणाम की धमकी दी जा रही थी?
* सुसाइड नोट और फोन के राज: मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि उनके फोन और सुसाइड नोट में दर्ज आखिरी सच को छिपाने की कोशिश कौन कर रहा है?
प्रशासनिक दबाव के आरोपों पर सीधा पलटवार
विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए CM अधिकारी ने स्पष्ट किया कि न तो प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई नोटिस जारी हुआ था और न ही कोई राजनीतिक दबाव था। उन्होंने जांच एजेंसियों और जिला मजिस्ट्रेट को निष्पक्ष पोस्टमार्टम और फोन-कॉल रिकॉर्ड्स की गहन फॉरेंसिक जांच के सख्त निर्देश दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बीरभूम के इस कद्दावर नेता की मौत के पीछे छिपे चेहरों की पहचान हो पाएगी, या यह मामला भी फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा?