Jammu and Kashmir : अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने श्रीनगर की धरती पर कदम रखते ही ऐसा कूटनीतिक धमाका किया है, जिसकी गूंज से रावलपिंडी से लेकर इस्लामाबाद तक हड़कंप मच गया है। गोर ने दो टूक शब्दों में पाकिस्तान के मुंह पर तमाचा जड़ते हुए साफ कर दिया कि “जम्मू-कश्मीर भारत का बेहद अहम और अभिन्न हिस्सा है।”
डोनाल्ड ट्रंप के जरिए कश्मीर का रोना रोकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का सपना देख रहे पाकिस्तानी हुक्मरानों—शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर—के लिए यह बयान किसी 440 वोल्ट के करंट से कम नहीं है।
कश्मीर में गोर की मौजूदगी: पाकिस्तान के झूठ का ‘द एंड’
अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद पहली बार किसी अमेरिकी राजदूत का यह ऐतिहासिक कश्मीर दौरा है। सर्जियो गोर ने न केवल श्रीनगर पहुंचकर जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की, बल्कि घाटी में अमन, तरक्की और सामान्य होते हालातों को अपनी आंखों से देखा।
* एक तरफ PoJK में हाहाकार: पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में जनता भुखमरी, सेना और रेंजर्स की बर्बरता के खिलाफ सड़कों पर है, जहां मासूमों का खून बहाया जा रहा है।
* दूसरी तरफ घाटी में विकास की बहार: श्रीनगर में अमेरिकी राजदूत की मौजूदगी ने दुनिया को दिखा दिया कि नया कश्मीर किस तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पाकिस्तान जो दशकों से वाशिंगटन के सामने कश्मीर का ‘विक्टिम कार्ड’ खेलता आया था, सर्जियो गोर के इस ‘फर्स्ट हैंड’ दौरे ने उसके फर्जी एजेंडे को एक ही झटके में मिट्टी में मिला दिया।
लद्दाख से चीन को भी कड़ा संदेश
सर्जियो गोर का मिशन केवल कश्मीर तक सीमित नहीं है; वे सीधे लद्दाख का रुख कर रहे हैं। गलवान घाटी में भारत के हाथों मात खा चुके ड्रैगन (चीन) के लिए भी यह खुली चेतावनी है। विवादित और संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में अमेरिकी दूत की मौजूदगी यह साफ करती है कि भारत की संप्रभुता पर उंगली उठाने वालों को वाशिंगटन भी कोई तवज्जो नहीं देने वाला।
मुनीर-शहबाज का मंसूबा ध्वस्त, ट्रंप के ‘खास’ ने दिखाया आईना
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच ‘डाकिया’ बनकर खुद को बड़ा कूटनीतिज्ञ समझ रहे आसिम मुनीर यह मुगालता पाले बैठे थे कि वे ट्रंप प्रशासन को कश्मीर में टांग अड़ाने के लिए मना लेंगे। लेकिन ट्रंप के बेहद करीबी माने जाने वाले सर्जियो गोर—जो दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत भी हैं—ने सीधे श्रीनगर जाकर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों का जनाजा निकाल दिया।
अमेरिकी राजदूत का यह रुख भारत की आतंकवाद-रोधी नीति और ऐतिहासिक संप्रभुता पर दुनिया की सबसे बड़ी मुहर है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान का दशकों पुराना प्रोपेगैंडा अब हमेशा के लिए दफन होने की कगार पर पहुंच चुका है।