* रेलवे से हाईवे तक… मोदी कैबिनेट ने लगाई 5 फैसलों पर मुहर, बिहार समेत इन राज्यों को तोहफा
Modi Cabinet Decisions : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने देश के ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को सशक्त बनाने के लिए ₹13,041 करोड़ की 5 प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसमें बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग-22 का 4-लेन चौड़ीकरण और चार राज्यों में रेलवे की 4 मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं शामिल हैं।
बिहार को बड़ी सौगात: मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा सेक्शन बनेगा 4-लेन हाईवे
बिहार में कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास को रफ्तार देने के लिए NH-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को 4-लेन में अपग्रेड किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट राज्य के लिए लाइफलाइन साबित होगा।
* लागत और मॉडल: इस परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्युइटी मोड (HAM) के तहत ₹3,590.73 करोड़ की कुल पूंजी लागत से होगा। इसकी कुल लंबाई 82.58 किलोमीटर है।
* रणनीतिक और व्यापारिक महत्व: यह हाईवे भारत-नेपाल सीमा (सोनबरसा) को NH-27 (पूर्व-पश्चिम गलियारा) के जरिए मुजफ्फरपुर, बरौनी औद्योगिक क्षेत्र और भिटामोर लैंड पोर्ट से जोड़ेगा, जिससे सीमा पार व्यापार और लॉजिस्टिक्स को गति मिलेगी।
* ट्रैफिक व जाम से राहत: मुजफ्फरपुर, मुक्सुदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, डुमरा, भुतही और सोनबरसा के घनी आबादी वाले इलाकों को जाम से स्थायी मुक्ति मिलेगी।
* हाई-स्पीड इंजीनियरिंग: इसे 100 किमी/घंटा की अधिकतम और 80 किमी/घंटा की औसत गति के लिए डिजाइन किया गया है। सुरक्षित यात्रा के लिए मीडियन (डिवाइडर) में कोई समतल खुला मार्ग (at-grade median opening) नहीं होगा।
* पुल और फ्लाईओवर: बागमती नदी पर 340 मीटर लंबे बड़े पुल सहित कुल 7 प्रमुख पुल, 3 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) और 2 फ्लाईओवर (1,170 मीटर और 270 मीटर) बनाए जाएंगे।
* पीएम गतिशक्ति एकीकरण: यह कॉरिडोर 5 आर्थिक केंद्रों (4 औद्योगिक एस्टेट व 1 मेगा फूड पार्क), 4 सामाजिक केंद्रों (बाबा गरीबनाथ मंदिर, माता जानकी मंदिर, पुनौरा धाम आदि) और 2 प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्रों (मुजफ्फरपुर व सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन) को निर्बाध कनेक्टिविटी देगा।
रेलवे का मेगा विस्तार: 4 राज्यों में ₹9,450 करोड़ की 4 मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं
भारतीय रेलवे के नेटवर्क विस्तार और परिचालन क्षमता को बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में चार नई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
स्वीकृत रेल परियोजनाओं का विवरण. …
* खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन: 173 किमी (पश्चिम बंगाल और ओडिशा) – लागत ₹3,352 करोड़
* भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: 75 किमी (ओडिशा) – लागत ₹1,583 करोड़
* गुम्मिडिपूंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: 90 किमी (आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) – लागत ₹2,229 करोड़
* कटक-पारादीप (बडाबन्धा) तीसरी और चौथी लाइन: 72 किमी (ओडिशा) – लागत ₹2,286 करोड़
रेल परियोजनाओं के बहुआयामी प्रभाव और लाभ
* 410 किमी अतिरिक्त नेटवर्क: 4 राज्यों के 8 जिलों में लगभग 410 किमी का अतिरिक्त ट्रैक जुड़ेगा, जिससे 6,448 गांवों के करीब 60 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
* माल ढुलाई क्षमता में इजाफा: कोयला, लौह अयस्क, स्टील, सीमेंट, ऑटोमोबाइल और अनाज के परिवहन के लिए यह प्रमुख रूट है। इससे प्रति वर्ष 76 मिलियन टन (MTPA) की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी।
* धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक आसान पहुंच: भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, चांदीपुर बीच, पुलिकट झील, मां भद्रकाली मंदिर और ललितगिरि बौद्ध स्थल जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों की यात्रा सुगम होगी।
* पर्यावरण संरक्षण: इन रेल परियोजनाओं से लगभग 13 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी और कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) उत्सर्जन में 65 करोड़ किलोग्राम की कटौती होगी, जो 260 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।