Pakistan High Commission : कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी हरकतों से बाज न आने वाले पाकिस्तान को भारत ने एक बार फिर उसकी ही भाषा में कड़ा सबक सिखाया है। इस्लामाबाद की ओछी हरकतों का दो-टूक जवाब देते हुए दिल्ली पुलिस ने चाणक्यपुरी स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर लगे ट्रैफिक बोलार्ड और सुरक्षा बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका है।
सालों से पाकिस्तानी दूतावास के बाहर वीआईपी सुरक्षा का जो घेरा सजा हुआ था, उसे भारत ने एक झटके में समेट दिया है। यह सीधी और सख्त कार्रवाई यह बताने के लिए काफी है कि नया भारत अब किसी भी उकसावे को चुपचाप बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
इस्लामाबाद की हिमाकत का दिल्ली में हिसाब चुकता
यह कड़ा कदम अकारण नहीं उठाया गया है। हाल ही में पाकिस्तान ने इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर लगे पार्किंग पोल हटाने की घटिया हरकत की थी। भारत के कड़े विरोध के बावजूद जब पाकिस्तान अपनी आदत से बाज नहीं आया, तो भारत ने भी जवाबी प्रहार करने में देर नहीं लगाई। ‘जैसे को तैसा’ की नीति अपनाते हुए दिल्ली में पाक उच्चायोग के बाहर से बैरिकेडिंग हटाकर साफ संदेश दे दिया गया—अगर हमारे राजनयिकों के साथ बदसलूकी होगी, तो दिल्ली में भी आपको कोई विशेषाधिकार नहीं मिलेगा।
पहलगाम का बदला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का खौफ
दोनों देशों के बीच तनाव की असल जड़ सीमा पार से जारी आतंकवाद है। 22 अप्रैल 2025 को हुए कायराना पहलगाम हमले (जिसमें 26 निर्दोषों की जान गई थी) के बाद भारत ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान और PoJK में आतंकियों के नौ ठिकानों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया था। भारत के उस रौद्र रूप से पाकिस्तान आज तक उबर नहीं पाया है और बौखलाहट में आए दिन कूटनीतिक पैंतरेबाजी की कोशिश करता रहता है।
कश्मीर पर अमेरिकी रुख से पाकिस्तान को मिर्ची
पाकिस्तान की हताशा तब और बढ़ गई जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और श्रीनगर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग करार दिया। इतना ही नहीं, अमेरिका द्वारा अपने ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा के संकेत ने पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा की कमर तोड़ दी। इस सच को बर्दाश्त न कर पाने वाले पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर अपनी बेबसी ही जाहिर की।
दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर से सुरक्षा घेरा हटाना सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि इस्लामाबाद के मुंह पर एक करारा कूटनीतिक तमाचा है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर रिश्ते बराबरी और सम्मान के आधार पर नहीं चलेंगे, तो भारत भी किसी भी स्तर पर झुकने वाला नहीं है।