उमानाथ लाल दास
Rahul Gandhi : राहुल गांधी को पप्पू साबित करने के लिए करोड़ों फूंककर एक हाहाकारी प्रचारतंत्र खड़ा किया गया, पर वो डिगे नहीं, जमे रहे। … एक फेसबुक मित्र ऐसा फरमाते हैं। सही कह रहे हैं मित्र। इधर यदि करोड़ों फूंके गये तो उधर भी हेराल्ड से लेकर पार्टी फंड तक पानी की तरह बहाया जा रहा है। कभी पाकिस्तान भेजा जा रहा अय्यर को भाजपा को हराने के लिए तो कभी चीन से करार होता है, कभी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का विरोध किया जाता है चीन के हित में। कभी इंग्लैंड तो कभी अमरीका में भारत को बदनाम करते हुए नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई जाती है। कभी अपने पीएम के सामने आर्डिनेंस फाड़ा जाता है तो कभी घोर सनातन विरोधियों का चहेता बनने के चक्कर में पुश्तैनी सीट से भागकर वायनाड में शरण लेनी पड़ती है। सचमुच 200% अडिग हैं अपनी राह में।
नेविगेशन के इतने पक्के कि अपनी दिशा से न जीरो डिग्री का डेविएशन और न इंच भर इधर-उधर। एस्सिमिलेशन (सात्मीकरण) में तो जबरदस्त महारत,,, जिस वाम और टीएमसी को डुबोया, जिस राजद और सपा का बंटाधार किया, जिस आप के जन्मजात दुश्मन थे वो सबके सब गोद में बैठ गये,,, जिस बाबासाहेब की संविधान सभा में इंट्री के सारे रास्तों की बैरिकेडिंग की और चुनाव तक में हरवाया, उसके चट्टे-बट्टे भी उनके गले से झूल रहे हैं। और कंपैटिबलिटी तो ऐसी कि पूछिए मत। जिस भगतसिंह और सुभाष चन्द्र को फूटी आंखों कांग्रेस ने देखना नहीं चाहा, आज उनके थिंक टैंक गांधी, सुभाष, भगतसिंह और अंबेडकर का भारत बनाने के सिंथेटिक जुमलों का कबूतर उड़ा रहे हैं।
यूज़र फ्रेंडली का तो जवाब नहीं, लिबरल ब्रिगेड से लेकर रबिश गैंग तक एक्सेसिबल।
