JPSC JSSC Protest : सड़क से सोशल मीडिया तक शिकंजा: आंदोलन थमा तो छात्रों पर पुलिसिया हंटर शुरू, X को भेजा नोटिस!

Bindash Bol

JPSC JSSC Protest : झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा धांधली के खिलाफ उठी विरोध की चिंगारी भले ही सड़कों पर शांत होती दिख रही हो, लेकिन अब सरकार और प्रशासन का ‘डिजिटल हंटर’ चलना शुरू हो गया है। सड़कों पर आंदोलन थमा तो पुलिस ने सोशल मीडिया की मोर्चाबंदी को निशाने पर ले लिया है। रांची साइबर क्राइम पुलिस ने ‘जेपीएससी रिफॉर्म मंच’ नाम के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर सीधा वार करते हुए माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘X Corp’ को नोटिस थमा दिया है।

BNSS धारा 94 के तहत नोटिस: हैंडल चलाने वालों की मांगी कुंडली

​रांची साइबर थाने ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 94 का इस्तेमाल करते हुए X से विवादित अकाउंट का पूरा कच्चा-चिट्ठा तलब किया है। रांची के कोतवाली थाने में दर्ज कांड संख्या 183/2026 के तहत पुलिस ने केवल नाम-पता ही नहीं, बल्कि अकाउंट के पीछे मौजूद लोगों को बेनकाब करने के लिए डिजिटल कुंडली मांगी है…

* यूजर का पूरा नाम, आवासीय पता, एक्टिव मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी

* ​10 अगस्त 2026 और उससे पहले के सटीक लॉगिन-लॉगआउट टाइमस्टैम्प्स

* ​इस्तेमाल किए गए इंटरनेट आईपी एड्रेस (IP Address) और डिवाइस की पूरी जानकारी

‘सरकार की छवि बिगाड़ने की साजिश’ का आरोप

​साइबर पुलिस के मुताबिक, आंदोलन की आड़ में सरकार और प्रशासन के खिलाफ भ्रामक और भड़काऊ नैरेटिव गढ़ा जा रहा था। नोटिस में दर्ज प्रमुख आरोप…

* ​भड़काऊ वीडियो: ‘सरकार ने छात्रों से धोखा किया’ और ‘जेएमएम के गुंडे छात्रों को धमका रहे हैं’ जैसे दावों वाले वीडियो फैलाकर जनता में डर और असंतोष पैदा करने का प्रयास।

* ​संस्थानों की साख पर हमला: ‘आदिवासी राज्य में आदिवासियों पर जुल्म’ जैसे बयानों को सरकार की प्रतिष्ठा गिराने और सामाजिक तनाव भड़काने वाली साजिश करार दिया गया है।

* ​सांप्रदायिक व सामाजिक सौहार्द को खतरा: पुलिस का दावा है कि सोशल मीडिया पोस्ट्स का मकसद लोकतांत्रिक विरोध नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को चुनौती देना था।

सड़कों पर सख्त पहरा: अब बिना इजाजत न रैली, न घेराव

​इधर डिजिटल स्पेस पर सख्ती के बीच, रांची जिला प्रशासन ने जमीनी प्रदर्शनों पर भी पूरी तरह लगाम कस दी है। रांची सदर और बुंडू अनुमंडल क्षेत्रों में अब धरना, प्रदर्शन, घेराव या रैली निकालने से पहले प्रशासन से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

* ​हेडकाउंट और रूट बताना अनिवार्य: आयोजकों को अब सिर्फ अर्जी नहीं देनी होगी, बल्कि रैली में कितने लोग शामिल होंगे, रूट क्या होगा और अगुवाई करने वाले मुख्य चेहरे कौन होंगे—सबका ब्योरा पहले ही पुलिस को सौंपना होगा।

* ​प्रशासन की दो टूक: विरोध का संवैधानिक अधिकार अपनी जगह है, लेकिन आंदोलन के नाम पर सड़कें जाम करना या अराजकता फैलाना अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

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