Rahul Gandhi : मनुस्मृति बनाम हिजाब: राहुल गांधी के बयानों पर BJP का दोहरा मापदंड वाला वार, पुराना वीडियो जारी कर दागे तीखे सवाल

Bindash Bol

Rahul Gandhi : कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘मनुस्मृति’ वाले बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राहुल गांधी के पुराने बयानों का एक वीडियो साझा करते हुए उन पर महिला अधिकारों के मुद्दे पर ‘पाखंड’ और ‘चुनिंदा राजनीति’ करने का सीधा आरोप लगाया है।

BJP का सीधा हमला: ‘हिंदू परंपराओं पर पितृसत्ता का पाठ, हिजाब पर पसंद की आजादी?’

​BJP द्वारा जारी वीडियो में हिजाब पहनी छात्राएं राहुल गांधी से अबाया और हिजाब पर उनकी राय पूछती नजर आ रही हैं। इस पर राहुल गांधी कहते हैं कि महिला क्या पहनना चाहती है, यह पूरी तरह से उसकी व्यक्तिगत पसंद (चॉइस) है और इस पर किसी को रोक-टोक नहीं करनी चाहिए।

इस वीडियो के आधार पर BJP ने राहुल गांधी से तीखे सवाल पूछे हैं…

* दोहरा पैमाना: हिंदू महिलाओं और परंपराओं पर बात करते समय राहुल गांधी ‘पितृसत्ता को कुचलने’ का आह्वान करते हैं, लेकिन हिजाब/अबाया के मुद्दे पर वही सिद्धांत अचानक ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ में कैसे बदल जाता है?
* चयनात्मक दृष्टिकोण: क्या पितृसत्ता और महिला सशक्तिकरण की लड़ाई धर्म देखकर तय की जाएगी?
* समान मानक की मांग: यदि वास्तविक लक्ष्य महिला सशक्तिकरण ही है, तो सभी महिलाओं के अधिकारों के लिए एक समान पैमाना क्यों नहीं लागू होता?

राहुल गांधी ने मनुस्मृति को लेकर क्या कहा था?

​पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मनुस्मृति का हवाला देकर महिलाओं की स्वतंत्रता पर बात रखी थी…

* ​परंपरागत सीमाओं से बाहर पहचान: उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल मां, बेटी या पत्नी के रूप में ही नहीं देखा जाना चाहिए। वे हर क्षेत्र में एक स्वतंत्र पेशेवर के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं।
* ​मनुस्मृति का संदर्भ: राहुल गांधी ने कहा कि मनुस्मृति के अनुसार महिला को कभी स्वतंत्र नहीं माना गया—बचपन में पिता, युवावस्था में पति और बाद में बेटों के अधीन। उनका तर्क था कि देश की असली ताकत तभी सामने आएगी जब महिलाएं पूरी तरह आत्मनिर्भर और स्वतंत्र होंगी।

हालिया कानूनी संदर्भ

​BJP का यह पलटवार ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी अपनी एक टिप्पणी में हिजाब को इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं माना था। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर देश में महिला सशक्तिकरण, धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत पसंद की सीमाओं पर नई बहस छेड़ दी है।

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