Sone River Dispute : ‘नई बोतल में पुरानी शराब’… सोन नदी समझौते पर सरयू राय का बड़ा हमला—बोले, “झारखंड को एक लोटा पानी भी नया नहीं मिला!”

Bindash Bol

Jharkhand Politics : 50 साल पुराने समझौते पर जीत का ढोल? सोन जल बंटवारे को सरयू राय ने बताया फर्जी जश्न, उठाए तीखे सवाल!

Saryu Roy : सोन नदी जल समझौता: समाधान या आंखों में धूल? सरयू राय ने आंकड़ों के साथ खोली सरकारों के दावों की पोल

Sone River Dispute : बिहार और झारखंड के बीच हुए बहुचर्चित सोन नदी जल बंटवारा समझौते को जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘नई बोतल में पुरानी शराब’ और जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला करार दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए दो टूक कहा कि इस बहुप्रचारित समझौते से झारखंड को ‘एक लोटा अतिरिक्त पानी’ भी हासिल नहीं हुआ है।

आंकड़ों की बाजीगरी, नया कुछ भी नहीं

​सरयू राय ने तथ्यों के साथ सरकारों के दावों की हवा निकालते हुए स्पष्ट किया….

* ​1973 का पुराना आवंटन: झारखंड के हिस्से का 20 लाख एकड़ फीट पानी 1973 के बाणसागर समझौते में ही तय हो चुका था। इसे आज नया बताकर पेश करना हास्यास्पद है।

* ​अविभाजित बिहार का कोटा: बाणसागर समझौते के तहत इंद्रपुरी बराज पर कुल 7.75 MAF पानी मिला था। इसमें से 5 MAF पानी 150 साल पुरानी सोन नहर प्रणाली के लिए सुरक्षित था। बाकी बचे 2.75 MAF (27.50 लाख एकड़ फीट) में से ही झारखंड को यह 20 लाख एकड़ फीट मिला था।

* ​झारखंड की अपनी नदियों का पानी: यह कोई उपकार नहीं बल्कि झारखंड की कनहर (4.32 लाख एकड़ फीट) और उत्तर कोयल (15.627 लाख एकड़ फीट) जैसी नदियों का अपना जलप्रवाह है, जो सीधे सोन में गिरता है।

अधूरी परियोजनाएं और नीतिगत नाकामी

​सरयू राय ने सरकारों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पानी का आवंटन कागजों पर तो दशकों पहले हो गया, लेकिन बुनियादी ढांचा खड़ा करने में हुक्मरान पूरी तरह नाकाम रहे….

* ​कदवन डैम की बदहाली: 1980 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र द्वारा शिलान्यास किए जाने के बावजूद कदवन डैम आज तक अधूरा है। नए समझौते में भी यह साफ नहीं है कि इससे बनने वाली पनबिजली और पानी में झारखंड का क्या अधिकार होगा।

* ​ठप पड़ी योजनाएं: कनहर पर बाराडीह डैम, उत्तर कोयल का मंडल डैम और ओरंगा परियोजना जैसी जीवनदायिनी योजनाएं दशकों से अधर में लटकी हैं। पलामू की आधा दर्जन परियोजनाएं फाइलों में दम तोड़ चुकी हैं।

फर्जी जश्न के बजाय केंद्र से मुआवजे की मांग करें

​सरयू राय ने कहा कि 1973 के बाणसागर समझौते के क्रियान्वयन में बिहार और झारखंड दोनों ठगे गए हैं। ऐसे में गृहमंत्री की मौजूदगी में 20 साल पुराने मुद्दे को सुलझाने का झूठा डंका पीटने के बजाय सरकारों को केंद्र और केंद्रीय जल आयोग (CWC) की नाकामी के खिलाफ विशेष पैकेज और सहायता की मांग करनी चाहिए थी।
​उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब भौगोलिक और तार्किक बंटवारा पहले ही हो चुका है, तो गैर-मौजूद विवाद का ढोल पीटना केवल राजनीतिक खानापूर्ति है।

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