Sahitya Akademi :कोलकाता/राँची: साहित्य अकादमी की ओर से कोलकाता में आयोजित दो दिवसीय विशेष राष्ट्रीय कार्यशाला में ‘वन्देमातरम’ विषय पर विचार-विमर्श हुआ। 29 और 30 अगस्त 2026 को आयोजित इस संगोष्ठी में झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए राँची से वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी व चिंतक डॉ. प्रशांत करण ने सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कार्यशाला के पहले दिन (29 अगस्त) आयोजित मुख्य सत्र में डॉ. प्रशांत करण ने ‘वन्देमातरम’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक परिप्रेक्ष्य को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्र चेतना के विकास में इस गीत की भूमिका और समकालीन संदर्भों में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार रखे।
* राष्ट्रीय फलक पर भागीदारी: संगोष्ठी में देश भर के ख्यातिप्राप्त रचनाकारों के साथ-साथ विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर राज्यों से एक-एक प्रतिनिधि साहित्यकार को आमंत्रित किया गया था।
* सांस्कृतिक संवाद: दो दिनों तक चले इस विमर्श में विभिन्न राज्यों के विचारकों ने भारतीय साहित्य और राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े विविध पक्षों पर अपने पत्र और व्याख्यान प्रस्तुत किए।
* झारखंड की सशक्त उपस्थिति: प्रशासनिक सेवा के साथ साहित्य और अध्ययन में सक्रिय डॉ. प्रशांत करण के संबोधन को विद्वत वर्ग ने विशेष रूप से सराहा।
