ध्रुव गुप्त
(आईपीएस) पटना
Teachers Day : शिक्षक दिवस पर आम तौर पर लोग शिक्षक और गुरु का भेद ही मिटा देते है। सच। तो यह है कि शिक्षक और गुरु दो अलग व्यक्तित्व हैं और बहुत हद तक परस्पर विरोधी भी। शिक्षक जीवन का स्वीकार सिखाता है। वह दुनियावी ज्ञान देकर हमें जीवन के संघर्षों के लिए तैयार करता है। जीवन और परिवेश को सुंदर और उपयोगी बनाने का मार्ग दिखाता है। मां -बाप, स्कूल-कॉलेज के शिक्षक, मित्र, सहकर्मी,जीवन में मिलने वाले अच्छे-बुरे लोग, किताबें, जीवन-यात्रा की कठिन परिस्थितियां – ये सब हमारे शिक्षक हैं। इसके विपरीत गुरु जीवन की नहीं, अध्यात्म की यात्रा का सारथि है। वह जीवन और संसार का अस्वीकार सिखाता है। उसकी दृष्टि में संसार मिथ्या है, भ्रम है जिसमें हम सब भटक रहे हैं। इस मिथ्या संसार और जीवन में आवागमन से मुक्ति दिलाकर मोक्ष अथवा निर्वाण के मार्ग पर ले जाना गुरु का दायित्व कहा जाता है।
मेरी दृष्टि में जीवन को सही अर्थों में जीने और इस संसार को खूबसूरत बनाने की कला सिखाने वाला शिक्षक ही वरेण्य हैं, सम्माननीय है। इस संसार के आगे क्या है, यह किसी को पता नहीं। शिक्षक को एक काल्पनिक संसार के सपने दिखाकर जीवन से पलायन सिखाने वाले गुरु का पर्यायवाची बना देना उचित नहीं है।
