BRICS समिट का दूसरा दिन आज, भारत मंडपम में फिर जुटेगा ग्लोबल जमावड़ा; PM मोदी की ताबड़तोड़ द्विपक्षीय बैठकें
BRICS Summit 2026 :नई दिल्ली के भव्य भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय BRICS शिखर सम्मेलन 2026 का दूसरा और अंतिम दिन वैश्विक राजनीति के फलक पर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। दुनिया भर की निगाहें इस महाकुंभ पर टिकी थीं, जहां बहुपक्षीय कूटनीति, भू-राजनीतिक संवाद और भविष्य के प्रशासनिक खाके ने एक नया आयाम गढ़ा है।
कूटनीतिक हलचल और द्विपक्षीय आयाम
सम्मेलन के समापन दिवस की शुरुआत सुबह 9:55 बजे राष्ट्राध्यक्षों के आगमन और लेवल-2 पर आधिकारिक फैमिली फोटो के साथ हुई। इसके बाद, ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth’ के केंद्रीय विषय पर मुख्य ओपन सेशन का आगाज हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज का कूटनीतिक शेड्यूल बेहद व्यस्त और प्रभावी रहा, जिसमें उन्होंने दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयां दीं….
* दोपहर 2:30 बजे: कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव के साथ रणनीतिक चर्चा।
* दोपहर 3:00 बजे: फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर से मुलाकात।
* दोपहर 3:30 बजे: मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी के साथ द्विपक्षीय संवाद।
* शाम 4:10 बजे: दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति मातामेला सिरिल रामफोसा के साथ उच्चस्तरीय बैठक।
इस बीच, रात्रिभोज के दौरान कुछ कूटनीतिक चर्चाएं भी सुर्खियों में रहीं—चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद के प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल न होने पर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म रहीं, हालांकि सूत्रों के मुताबिक चीनी राष्ट्रपति विश्राम के लिए अपने होटल लौट गए थे। वहीं, शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी, जिनपिंग और पुतिन की एक साथ नजर आई तस्वीर ने वैश्विक मीडिया का विशेष ध्यान खींचा।

नई दिल्ली घोषणा 2026: सर्वसम्मति और शांति का संदेश
शिखर सम्मेलन के सबसे बड़े पड़ाव के रूप में ‘नई दिल्ली घोषणा 2026’ को सभी 11 सदस्य देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया) की सर्वसम्मति से औपचारिक रूप से मंजूरी मिल गई।
* टकराव और कूटनीति: घोषणापत्र में जंग और सैन्य टकराव को रोकने, अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान केवल बातचीत व कूटनीति के माध्यम से करने और वैश्विक मुद्दों पर हर देश के संप्रभु दृष्टिकोण का सम्मान करने का आह्वान किया गया।
* व्यापारिक सुरक्षा: एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर गहरी चिंता जताते हुए इन्हें स्पष्ट रूप से WTO नियमों के खिलाफ करार दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी का विजन: ‘रूल टेकर’ से ‘रूल शेपर’ तक
बंद कमरे के सत्र और पूर्ण अधिवेशन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन प्रणाली के पारंपरिक पिरामिड ढांचे पर करारा प्रहार किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वर्तमान व्यवस्था में शक्ति का केंद्रीयकरण शीर्ष पर है, जबकि संकटों का सबसे बड़ा सामना ‘ग्लोबल साउथ’ को करना पड़ता है।
”अगर दुनिया का भविष्य साझा है, तो उसे तय करने और आकार देने का अधिकार भी सभी का समान रूप से होना चाहिए।”
प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ के हितों को रेखांकित करते हुए कई दूरदर्शी प्रस्ताव रखे….
1.रूल शेपर की भूमिका: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर स्पेस, अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में विकासशील देशों को केवल ‘रूल टेकर’ (नियम मानने वाला) नहीं, बल्कि ‘रूल शेपर’ (नियम गढ़ने वाला) बनना होगा।
2.10 सूत्रीय रिफॉर्म रोडमैप: वैश्विक शासन में सुधार के लिए प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और पारदर्शिता पर आधारित 10 ठोस प्रस्तावों का आह्वान, जिन्हें अगली समिट तक रोडमैप का रूप दिया जाए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों को अब और न टालते हुए टेक्स्ट-बेस्ड नेगोशिएशंस को निश्चित समयसीमा देने की मांग की गई।
3. BRICS@20 और निरंतरता तंत्र: संगठन को अगले दो दशकों के लिए नई दिशा देने हेतु ‘BRICS Community Continuity and Implementation Mechanism’ का प्रस्ताव रखा गया, जिससे ट्रोयका के माध्यम से लिए गए फैसलों की डिजिटल रिपॉजिटरी तैयार कर उनकी निरंतर निगरानी की जा सके।
वैश्विक शांति और बहुपक्षवाद का संकल्प
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी अपने संबोधन में वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में BRICS की सामूहिक और बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।
’संयुक्त राष्ट्र साउथ-साउथ सहयोग दिवस’ के विशेष संयोग के साथ संपन्न हुआ यह सम्मेलन इस बात का स्पष्ट संदेश है कि अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज से प्रभाव और विशेषाधिकार से साझेदारी की ओर बदलाव का दौर शुरू हो चुका है। नई दिल्ली की भूमि से उठा यह स्वर आने वाले दशकों में वैश्विक कूटनीति, आर्थिक न्याय और बहुपक्षीय सुधारों की नई इबारत लिखेगा।
