BRICS Summit 2026 : कूटनीति की नई इबारत…7 साल बाद मिले मोदी और जिनपिंग, ब्रिक्स के मंच से पाकिस्तान को आतंक पर दो-टूक

Siddarth Saurabh

BRICS Summit 2026 :​भारत और चीन के बीच के रिश्तों की जमी हुई बर्फ अब पिघलती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई द्विपक्षीय मुलाकात ने वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज कर दी है। गलवान घाटी की झड़प के बाद पिछले सात वर्षों में यह पहला मौका था जब शी जिनपिंग भारत के दौरे पर आए और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की।

इस अहम बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल भी मौजूद रहे, जिसने दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच संवाद के नए द्वार खोल दिए हैं।

​एक-दूसरे की ताकत से आगे बढ़ने का संदेश

​मुलाकात की शुरुआत गर्मजोशी के साथ हुई। पीएम मोदी ने ब्रिक्स समिट में जिनपिंग के सकारात्मक वक्तव्य के लिए उनका आभार जताया और द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की बात दोहराई। इसके जवाब में शी जिनपिंग ने भी रिश्तों को पटरी पर लाने की वकालत की। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे की ताकत और खूबियों से सीखते हुए साझा विकास के पथ पर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने पश्चिम एशिया के संकट पर चिंता जताते हुए वहां शांति बहाली में ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा भी जाहिर की।

​पहलगाम हमले की निंदा और आतंकवाद पर कड़ा प्रहार

​इस सम्मेलन का सबसे बड़ा और कूटनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील पहलू आतंकवाद के खिलाफ ब्रिक्स देशों का साझा रुख रहा। समूह ने बिना किसी लाग-लपेट के 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले की खुलकर निंदा की, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी।
​साझा बयान में स्पष्ट किया गया कि आतंकवाद चाहे किसी भी रूप में हो, उसे किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। ब्रिक्स देशों ने आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, टेरर फंडिंग और उन्हें मिलने वाली सुरक्षित पनाहगाहों को नेस्तनाबूद करने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने पर जोर दिया।

​पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें

​चीन के समर्थन के दम पर अकसर भारत के खिलाफ आंख दिखाने वाले पाकिस्तान के लिए यह बैठक बड़ा झटका साबित हुई है। ड्रैगन के इस बदले हुए तेवर ने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है। भारत की धरती पर आकर चीनी राष्ट्रपति द्वारा आतंकवाद के खिलाफ इस तरह के कड़े शब्दों का इस्तेमाल करना और सीमा पार आतंक की मुखालफत करना यह बताने के लिए काफी है कि भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ब्रिक्स मंच से आतंकवाद के खिलाफ आया यह एकजुट संदेश पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह बेनकाब कर चुका है।

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