Assam : कचौरी-समोसे के स्वाद में घुली सियासत: Gen-Z के इस वायरल स्लोगन पर क्यों भिड़ गए देश के दिग्गज नेता?

Bindash Bol

* एक कचौरी, दो समोसा… नेताओं की जुबान पर चढ़ा Gen-Z का यह स्लोगन, इंटरनेट पर मचा रहा है तहलका!

Assam : सोशल मीडिया की दुनिया में आजकल कौन सा ट्रेंड सिर चढ़कर बोल रहा है, यह पूछने की जरूरत नहीं है- जी हां, हम बात कर रहे हैं “एक कचौरी दो समोसा” वाले वायरल स्लोगन की। यह नारा अब केवल रील्स और मीम्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के बड़े-बड़े राजनेताओं के भाषणों और सोशल मीडिया पोस्ट्स का भी मुख्य हिस्सा बन चुका है।

कैसे हुई इस ट्रेंड की शुरुआत?

* ​सड़कों पर विरोध: देश के अलग-अलग हिस्सों में महिला सुरक्षा और अपराध के खिलाफ गुस्से का इजहार करने के लिए Gen-Z (युवा पीढ़ी) सड़कों पर उतरी।

* ​अनोखे नारे: इस प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने तीखे और व्यंग्यात्मक अंदाज में “एक कचौरी दो समोसा, मर्दों पर क्या भरोसा…” जैसे कैची स्लोगन गढ़े।

* ​सोशल मीडिया पर जंग: यह नारा एक तरफ जहां पुरुषों की रूढ़िवादी सोच पर तमाचा माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इंटरनेट पर इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या कुछ लोगों की वजह से पूरी मर्द जाति को निशाना बनाना सही है?

नेताओं ने भी चखा इस ट्रेंड का स्वाद

​यह मीम फेस्ट अब राजनीति के गलियारों में भी पहुंच चुका है और नेता इसे अपने-अपने अंदाज में लपक रहे हैं…

* हिमंत बिस्वा सरमा का अंदाज: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस ट्रेंड में कूदते हुए एक शानदार सेल्फी शेयर की। उन्होंने जनता की भीड़ के बीच तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन लिखा—‘एक कचौरी दो समोसा, आप सबका मेरे ऊपर भरोसा।’ उनका यह अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

* ​अखिलेश यादव का तंज: इससे पहले समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने इस स्लोगन का इस्तेमाल करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा था और कहा था—‘एक कचौरी दो समोसा, BJP वालों का क्या भरोसा।’

यह स्लोगन आज गंभीर मुद्दों के विरोध से शुरू होकर इंटरनेट की दुनिया का सबसे चर्चित राजनीतिक और सोशल मीम बन चुका है।
​अब सवाल यह उठता है कि क्या विरोध जताने के लिए ऐसे चटपटे स्लोगन अपनाना सही है, या यह गंभीर मुद्दों से ध्यान भटकाने का काम कर रहे हैं? आपकी इस पूरे मामले पर क्या राय है?

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