Russia Ukraine War : ​यूक्रेन संघर्ष खत्म कराने के लिए सक्रिय हुआ भारत… एस. जयशंकर बोले- रूस और कीव दोनों से हो रही है सीधी बातचीत

Bindash Bol

Russia Ukraine War : यूक्रेन संकट को समाप्त करने की दिशा में भारत ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत इस मामले में केवल मध्यस्थता की वकालत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस और यूक्रेन—दोनों देशों के साथ सीधे संवाद में जुटा है। यह पहला मौका है जब भारत ने इस लंबे समय से जारी युद्ध को रोकने के लिए अपनी सक्रिय पहल को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है।

मुख्य बिंदु और कूटनीतिक पहल

* ​प्रत्यक्ष संवाद: भारत कीव और मॉस्को दोनों के संपर्क में है और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने का प्रयास कर रहा है।

* ​काला सागर और सुरक्षा: भारत का मुख्य फोकस काला सागर में जहाजों की आवाजाही की सुरक्षा, वैश्विक अनाज निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने पर है।

* ​पुतिन की सराहना: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास इस विवाद का ऐसा समाधान निकालने के लिए व्यावहारिक विचार हैं, जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो।

* ​यूक्रेन का बयान: हाल ही में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने पुष्टि की थी कि कीव को संभावित युद्धविराम के लिए भारत सहित कुछ अन्य देशों से प्रस्ताव मिले हैं।

बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता: जयशंकर

​म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि इस संघर्ष को लेकर भारत का रुख शुरू से बहुत स्पष्ट रहा है कि युद्ध का कोई सैन्य समाधान नहीं है और इसे केवल बातचीत तथा कूटनीति के जरिए ही सुलझाया जा सकता है।
​उन्होंने कहा, “हम पिछले कई वर्षों से शांति की हिमायत कर रहे हैं, लेकिन हाल के महीनों में हम इससे कहीं आगे बढ़कर इसमें सक्रिय रूप से शामिल हुए हैं। हमारी कोशिशें तात्कालिक चिंताओं जैसे अनाज और ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ हमलों को रोकने की दिशा में जारी हैं।”

​ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ व्यापक वार्ता के दौरान भी इस बात पर जोर दिया था कि इस अंतहीन युद्ध को अब समाप्त होना चाहिए।

रूस के साथ ऐतिहासिक और मजबूत रिश्ते

​रूस के साथ भारत के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों पर बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि 1950 के दशक से चले आ रहे इन ऐतिहासिक रिश्तों को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने याद दिलाया कि जब भी भारत की क्षेत्रीय अखंडता खतरे में आई, तब सोवियत संघ (अब रूस) ने हर मुश्किल समय में भारत का साथ निभाया है।

​जयशंकर ने कहा कि कूटनीतिक उतार-चढ़ाव के दौर में भी दोनों देशों के संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं और आज के समय में यह रणनीतिक जुड़ाव और अधिक व्यापक हो चुका है। भारत इसी भरोसे और मजबूत कूटनीतिक साख का उपयोग कर वैश्विक शांति स्थापित करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।

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